BJP ने दिल्ली में झोंक दी थी पूरी ताकत,फिर भी केजरीवाल को नहीं दे पाए मात, कांग्रेस की 67 सीटों पर जमानत जब्त

BJP ने दिल्ली में झोंक दी थी पूरी ताकत,फिर भी केजरीवाल को नहीं दे पाए मात, कांग्रेस की 67 सीटों पर जमानत जब्त

SunStarAdmin 12-02-2020

नई दिल्ली : अन्ना आंदोलन से निकले अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के गठन के महज 7 साल हुए हैं और उन्होंने दिल्ली के दंगल में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दम भरने वाली भाजपा को लगातार दूसरी बार करारी मात दी है। केजरीवाल को मात देने के लिए बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, इसके बाद भी वह अपने सत्ता के वनवास को खत्म नहीं कर सकी। दिल्ली चुनाव में बीजेपी दहाई का अंक पार नहीं कर सकी।

महज सात साल पहले अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में बनी आम आदमी पार्टी ने दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी को दिल्ली में करारी मात दी है। इस तरह से बीजेपी की दिल्ली में 22 साल के सत्ता के वनवास को खत्म करने की कोशिशें धरी की धरी रह गईं। इस तरह से बीजेपी का वनवास 5 साल का इजाफा और हो गया है। बीजेपी को आम आदमी पार्टी ने लगातार दूसरी बार शिकस्त दी और भाजपा दोनों बार डबल डिजिट भी पार नहीं कर सकी। दिल्ली में फिर से आम आदमी पार्टी की मिली प्रचंड जीत ने बीजेपी की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अन्ना आंदोलन से निकले अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के गठन के महज सात साल हुए हैं। कह सकते हैं कि आप का सियासी आधार दिल्ली तक ही सीमित है और थोड़ा बहुत पंजाब में है। वहीं, बीजेपी के 12 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं और मौजूदा समय में बीजेपी या उसके सहयोगियों की 16 राज्यों में सरकार में है। ऐसे में बीजेपी ने दिल्ली की सल्तनत पर काबिज होने के लिए अपने सभी बड़े नेताओं ने प्रचार में उतारा था, लेकिन केजरीवाल के विजय रथ को नहीं रोक सके।

आम आदमी पार्टी के मुफ्त बिजली, पानी व महिलाओं को डीटीसी में फ्री यात्रा के मुद्दे का बीजेपी कोई तोड़ नहीं निकाल सकी। हालांकि बीजेपी ने शाहीन बाग को भी मुद्दा बनाया और इसका उसे लाभ भी मिला, लेकिन इतना नहीं कि वह आम आदमी पार्टी से बराबरी का मुकाबला कर सके। जिस तरह से 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के साथ हुआ था, ठीक उसी तरह दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के लिए रहा कि (कोई विकल्प नहीं) फैक्टर ने काम किया। आम आदमी पार्टी ने बेहद चतुराई से दिल्ली के मतदाताओं को समझाया कि बीजेपी के पास केजरीवाल की जगह लेने के लिए कोई योग्य शख्सियत है ही नहीं।

पिछले छह माह के दौरान केजरीवाल सरकार ने और मुफ्त चीजों की घोषणा की जिसमें बसों और मेट्रो में महिलाओं और विद्यार्थियों को मुफ्त यात्रा शामिल है। इसके चलते महिलाओं के बीच केजरीवाल की पकड़ मजबूत हुई। दिल्ली में बीजेपी जिस तरह से शाहीन बाग मुद्दे पर आक्रामक रही, उससे मुस्लिम मतदाता आम आदमी पार्टी के पक्ष में एकजुट हो गया, जिसने करीब एक दर्जन सीटों को प्रभावित किया। वहीं, केजरीवाल ने सॉफ्ट हिंदुत्व की राह को भी अपनाया और उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ किया।

इससे वह हिंदू वोटों का बीजेपी के पक्ष में ध्रुवीकरण होने से भी रोकने में सफल रहे। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस बार के चुनाव को प्रतिष्ठा का चुनाव बनाकर लड़ा। गृह मंत्री अमित शाह की अगुआई में भाजपा ने गली-कूचे तक पहुंचकर आम आदमी पार्टी को बराबरी की टक्कर देने की कोशिश की। दिल्ली चुनावों में पीएम मोदी ने दो जनसभाएं कीं और गृहमंत्री अमित शाह ने करीब 50 रैलियां और रोड शो किए। शाह ने डोर टू डोर कैंपेन भी किया। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 30 आम सभाएं कीं। वहीं, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने 25 से ज्यादा रैलियों को संबोधित किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 12 और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 10 रैलियों को संबोधित किया। मुख्यमंत्रियों की बात करें तो बीजेपी के फायरब्रांड नेता और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में 15 रैलियों को संबोधित किया।

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