बजुर्ग दंपत्ति को खुले आसमान के नीचे करना पड़ रहा है जीवन यापन, कई बार प्रशासन से लगा चुके गुहार

बजुर्ग दंपत्ति को खुले आसमान के नीचे करना पड़ रहा है जीवन यापन, कई बार प्रशासन से लगा चुके गुहार

SunStarAdmin 29-02-2020

अनीश राजपूत, 

बालोद : जिंदगी के जिस पड़ाव में बुजुर्ग दंपत्ति को आज सुख सुविधाओं की दरकार है उस उम्र में वह गांव से बाहर खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हैं ,इसके पीछे कुछ ग्रामीणों की दबंगई पंचायत की मनमानी व प्रशासन की अनदेखी के कारण है लगभग 15 साल हो गए यह दंपत्ति खुले आसमान के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं ,गर्मी में पेड़ सहारा है तो वहीं बारिश के दिनों में किसी के घर के सामने बारिश की बूंदों से बचने सहारा लेते हैं।यह मामला बालोद जिले के भोईनापार ग्राम पंचायत के निवासी सुखनंदन टंडन व उर्मिला बाई का हैं जो खुले आसमान में पिछले 15 वर्षों से जीवन यापन कर रहे है।

गांव के दबंगई और सरपंच की अनदेखी के चलते खुले आसमान में रहने को मजबूर हैं दम्पति परिवार

 जानकारी के अनुसार पेड़ के गिरे ढहनी में बैठे यह दंपत्ति सुखनंदन टंडन व उर्मिला बाई है जो बालोद जिले के भोईनापार ग्राम पंचायत के निवासी हैं और दबंगों की दबंगई के शिकार होने के चलते सालों से खुले आसमान के नीचे पेड़ के साए में जीवन व्यतीत करने के मजबूर हैं, पीड़ित सुखनंदन टंडन बतलाते हैं कि वह इस गांव में सन 1978 से रह रहे हैं 1983-84 में इन्हें इंदिरा आवास आवास मिला था,जिसमें रहे थे इसी दौरान सुखनन्दन दंडन के माता का देहांत हो गया था, इस दौरान अपनी माता की  दह संस्कार और मृतक कार्यक्रम करने बिलासपुर चले गए थे,  जब 15 दिन बाद वापस गांव लौटे तो घर में रखे सारे सामान चोरी हो गए थे ,जिसकी शिकायत बालोद थाने में दर्ज कराया गया था , लेकिन आज तक इन दम्पति परिवार को  न्याय मिलने के बदले जेल की यातनाएं सहन करना पड़ा था।  जेल जाने दौरान गांव के दबंग रोजगार सहायक व सचिव ने इनके इंदिरा आवास को भी कब्जा कर लिया,.यही नहीं जेल से छूटकर आने के बाद गांव के दूसरे के घरों में सहारा लिया तो दबंगों ने घरवालों के ऊपर ही कई तरह के दबाव बना इन्हें सहारा देने से ही मना करवा दिया,अंत में थक हारकर 15 साल पहले से बुजुर्ग दंपत्ति इसी स्थान पर झोपड़ी बना रहने लगे थे,तो यहां भी दबंगों व पंचायत वालों ने झोपड़ी को तोड़ खुले आसमान के नीचे जीवन व्यतीत करने को मजबूर कर दिया । यही नहीं पीड़ित की माने तो सरकार द्वारा मिलने वाली योजना के तहत बने राशन कार्ड, आधार कार्ड, जॉब कार्ड को पंचायत वालों ने जप्त कर इन्हें सरकार के मिलने वाली योजनाओं से भी वंचित कर दिया गया है।

दम्पति परिवार  बारिश के दिनों में झिल्ली ओढ़कर पानी से करते हैं बचाव

खुले आसमान के नीचे रखें बर्तन और टूटे-फूटे इस पलंग को देख आप समझ ही सकते हैं कि यह दंपत्ति किस हद तक दबंगों की दबंगई के शिकार है, अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में यह दंपत्ति इसी जगह पर 15 सालों से खुले आसमान के नीचे अपने बचे कुचे जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं,पीड़िता उर्मिला बाई बतलाती हैं कि हवा चलने व बारिश में पानी गिरने पर झिल्ली को ओढ़कर व गर्मी के दिनों में इसी पेड़ की छांव के नीचे के नीचे बैठकर धूप से बचती है ।

 जिला पंचायत सीईओ बालोद, लोकेश चंद्राकर से बात करने पर कहा की  प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पात्रता में आता है या नही इसका जांच करा हर सम्भव प्रयास करने की बातों पर जोर दिए वही टीम भेज पूरे मामले का निरक्षण कराने के बाद ही इस पर निष्कर्ष निकलने की बात कही 


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