माेदी रथ राेकने के लिए ममता से मिलेंगे नायडू !

माेदी रथ राेकने के लिए ममता से मिलेंगे नायडू !

संदीप ठाकुर

नई दिल्ली। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए विपक्षी पार्टियां रणनीति बना उसे रफ्तार देने में जुट गई हैं। मोदी रथ को रोकने के लिए विपक्ष इस जोड़ तोड़ में लगा हुआ है कि समान विचार वाले दल एक मंच पर

आएं। इसके लिए इस बार पहल तेलगू देशम पार्टी (तेदेपा) अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने की है। कई विपक्षी नेताआें से वन-टू-वन बैठक करने के बाद वे आगामी 19 या 20 नवंबर को पश्चिम बंगाल
की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात करेने काेलकता जाएंंगे।

आैर ममता काे भाजपा विरोधी दल एक साझा मंच व भविष्य की योजना बनाने के लिए २२ नवंबर को नई दिल्ली में हाेने वाली बैठक मोने का अनुराेध करेंगे।

तेलगू देशम पार्टी के सूत्राें ने कहा कि हमारी कोशिश भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ लड़ने के लिए सभी को एक मंच पर लाना है। इसे आकार देने के लिएपार्टी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू अधिक से अधिक नेताआें से वन-टू-वन मिल
रहे हैं। वे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दूत बना कर भेजे गए अशाेक गहलोत से मुलाकात कर चुके हैं। इससे पहले नायडू ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी.देवेगौड़ा से मुलाकात की थी।

ये मुलाकात बेंगलुरु में देवेगौड़ा के घर पर हुई थी। इस बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री और देवेगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी भी शामिल हुए थे पिछले हफ़्ते चंद्रबाबू नायडू ने दिल्ली में राहुल गांधी, शरद पवार, अखिलेश यादव और फारूक अबदुल्ला से भी मुलाकात

की थी। अब वे ममता बनर्जी से मिलने काेलकता जाने वाले हैं। सूत्राें ने बताया कि वे चाहते हैं कि 22 तारीख काे दिल्ली में हाेने वाली बैठक में ममता स्वंय उपस्थित हाें,अपने किसी प्रतिनिधि काे न भेजें। नायडू ममता की
काेई यह पहली मुलाकात नहीं है। इससे पहले भी दाेनाें कई बार मिल चुके हैं आैर सांप्रदायिक ताकताें काे हराने के लिए एकजुटता पर बातचीत कर चुके
हैं।

लेकिन इस बार जाे बैठक हाेने जा रही है वह कुछ खास है आैर उसमें तमाम विराेधी नेताआें काे एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। एनआरसी का मुद्दा गरमा कर ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों का समर्थन हासिल

किया था उससे वह अचानक विपक्षी राजनीति की धुरी बन बैठी हैं। एनआरसी का मसौदा जारी होने के बाद तृणमूल को छोड़कर बांकी राजनीतिक दलों ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी थी। लेकिन ममता बनर्जी ने न सिर्फ खुलकर इसका विरोध किया।
बल्कि दिल्ली पहुंचकर अन्य दलों को भी साथ लेने की कोशिश की। इसमें वह सफल भी रही हैं। उनकी इस सफलता का लाभ विपक्ष उठाना चाहता है आैर इसलिए विपक्षा मंच पर ममता का रहना निहायत जरुरी माना जा रहा है। नायडू इसके लिए प्रयासरत हैं।

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