सवर्णों के 10 फीसदी कोटे पर इस पिछड़े नेता के भाषण ने दिल जीत लिया

सवर्णों के 10 फीसदी कोटे पर इस पिछड़े नेता के भाषण ने दिल जीत लिया

पटना: आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पारित हो गया. वहीं इसकी चर्चा के दौरान लोकसभा में दिए गए अपने भाषण के लिए मधुबनी से बीजेपी सांसद हुकुमदेव नारायण यादव की जमकर प्रशंसा हो रही है.

हुकुमदेव नारायण यादव के भाषण का वीडियो खूब वायरल हो रहा है. 2-3 मिनट का समय लेकर बोलने के लिए खड़े हुए हुकुमदेव ने 9 मिनट का भाषण दिया और इस दौरान लोकसभा स्पीकर ने भी उन्हें चुप नहीं कराया. लोकसभा में उनका ये भाषण शायद आने वाले वक्त में भी याद रखा जाएगा.

'अगड़ों ने अपना स्वार्थ त्याग कर पिछड़ों को मौका दिया'

हुकुमदेव नारायण यादव ने कहा कि कई सवर्ण या अगड़ी जाति के नेताओं ने पिछड़ा वर्ग के कई बड़े नेताओं को राजनीति में आगे बढ़ाया. उन्होंने कहा कि कई मौके पर अगड़ों के नेताओं ने राजनीतिक स्वार्थ त्याग कर पिछड़े नेताओं को आगे करने में मदद की. बीजेपी सांसद ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर और यूपी के सीएम मुलायम सिंह यादव का उदाहरण दिया.

सवर्ण नेताओं ने मुझे राजनीति में आगे बढ़ाया- हुकुमदेव

मधुबनी के सांसद ने कहा कि उनके राजनीति जीवन की शुरुआत में कैसे डॉ वैधनाथ झा, डॉ शिवचंद्र झा, दिगंबर ठाकुर और भागीरथ झा ने उनकी मदद की. उन्होंने कहा कि मैं जब इन लोगों के घर जाता था तो ये कहते थे कि हुकुमदेव जब पिछड़ों का राज आएगा तो गरीब सवर्णों के बच्चों का भी खयाल रखिएगा और आज वो समय आ गया है कि जब उन गरीबों के बारे में सोचा जा रहा है.

अगड़ों की मदद से कर्पूरी ठाकुर बने मुख्यमंत्री

बीजेपी सांसद ने कहा कि बिहार में रामानंद तिवारी और कपिलदेव सिंह जैसे अगड़ी जाति के नेता कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में लड़ते थे. उस समय जनता पार्टी में 33 राजपूत नेता थे, लेकिन उनमें से 17 ने सत्येंद्र नारायण सिंह का समर्थन करने के बजाय कर्पूरी ठाकुर का समर्थन किया और उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाया.

जीवनभर उदारवाद की लड़ाई लड़ूंगा- हुकुमदेव

हुकुमदेव ने समाजवाद और उदारवाद का जिक्र करते हुए कहा कि देश में हमेशा से दो विचारधाराओं की लड़ाई रही है. इसमें एक कट्टरपंथी है तो दूसरी उदारवादी. उन्होंने कहा कि मैं हमेशा से ही कट्टरपंथी विचारधारा का विरोधी रहा हूं. चाहे वह धार्मिक कट्टरता हो, राजनीतिक कट्टरता हो या सांप्रदायिक कट्टरता हो. हुकुमदेव ने कहा कि जब तक जिंदा रहूंगा, तब तक उदारवाद की लड़ाई लड़ता रहूंगा.

मुखिया से शुरू हुई थी हुकुमदेव की राजनीति

हुकुमदेव नारायण यादव ने पंचायत के मुखिया से अपने राजनीति जीवन की शुरूआत की थी. विधानसभा होते हुए 1977 में वो जनता पार्टी के टिकट पर पहली बार संसद पहुंचे. वो कई बार राज्यसभा और लोकसभा के लिए चुने गए. हुकुमदेव बीजेपी के नेता हैं लेकिन हमेशा राममनोहर लोहिया को अपना आदर्श मानते हुए खुद को समाजवादी विचारधारा के नेता बताते हैं.

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