सतनामी समाज एवं अनुसूचित जनजाति के न्यायाधीशों की नौकरी छीनने का मामला आया सामने

सतनामी समाज एवं अनुसूचित जनजाति के न्यायाधीशों की नौकरी छीनने का मामला आया सामने

रायपुर : छत्तीसगढ़ अधीनस्थ नगर पालिका में पदस्थ रहे सतनामी समाज एवं अनुसूचित जनजाति न्यायाधीशों की नौकरी छीनने का कारनामा सामने आया है। दिसंबर 2016 में उच्च न्यायालय की सेवा को कन्फर्म योग करते हुए सेवा से बर्खास्त कर दिए गए। इसके पश्चात अगस्त 2018 में संकेत खंडे को तथा अक्टूबर 2018 में विजय कुमार जोहले पिता स्वर्गीय श्री एमआर जोहले, निवासी सारंगढ़ जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़ को सेवा में कंफर्म कर बर्खास्त कर दिया गया। यह सब तत्काल भाजपा सरकार के इशारे पर किया गया है। भाजपा के ही शासनकाल में 2011 की में उच्च न्यायालय सेवा के जिला स्तर के 17 न्यायाधीशों को एक साथ सेवा में बर्खास्त किया गया था। उन बर्खास्त न्यायाधीशों के द्वारा स्टेशन पर सुनवाई करते हुए अक्टूबर 2018 में न्यायाधीशों को पुनः बहाली का आदेश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा किया गया एवं दिखाया गया था।

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यह ध्यान देने योग्य बात है कि न्यायाधीशों अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग कैसे अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारियों को शासकीय सेवा से पृथक किए जाने के संबंध में शासन को स्पष्ट सर्कुलर है, कि इन वर्गों के अधिकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त के पूर्व में कम से कम 3 बार उनकी परफॉर्मेंस सुधारने का मौका देने के संबंध में नोटिस देने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती थी।

जिला न्यायाधीश जैसी प्रथम श्रेणी की नौकरी से बर्खास्त किए जाने के पूर्व एक बार फिर शासन अथवा उच्च न्यायालय से कोई नोटिस नहीं दी गई। इसी से यह स्पष्ट है कि तत्काल भाजपा सरकार के आर.एस.एस के गोपनीयता का पालन करते हुए अनुसूचित जाति जनजाति के वरिष्ठ अधिकारियों को बिना शासकीय प्रक्रिया पूर्ण आनन-फानन में नौकरी से बर्खास्त किया गया। इसी बात को मीडिया से साझा करते हुए विजय कुमार ने आपने लिए न्याय की मांग की हैं तथा पुरे मामले की सूक्ष्म छानबीन किये जाने की मांग की हैं।


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