उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को सौगात, भाजपा नहीं चूकना चाहती यह मौका

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को सौगात, भाजपा नहीं चूकना चाहती यह मौका

नई दिल्ली । लोकसभा चुनाव ने उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को खुशी का पैगाम दिया है। सरकार ने उनके गन्ने के बकाया भुगतान की पक्की गारंटी सुनिश्चित की है। इसके लिए दस हजार करोड़ रुपये से अधिक का रियायती ऋण मुहैया कराने का फैसला किया गया है। लेकिन इस ऋण का उपयोग चीनी मिलें सिर्फ और सिर्फ गन्ना भुगतान में कर सकती हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में गन्ना किसानों की निर्णायक भूमिका को देखते हुए केंद्र सरकार को यह कदम उठाना पड़ा है। केंद्र के इस फैसले के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने भी कमर कसना शुरू कर दिया है। मिलों को पहले से ही चेतावनी जारी कर भुगतान करने का दबाव बढ़ा दिया गया है। राज्य की 30 से अधिक संसदीय सीटों पर गन्ना किसानों का राजनीतिक प्रभाव है, जहां वे चुनाव नतीजों को उलट पलट सकते हैं। भाजपा यह मौका चूकना नहीं चाहती।

उत्तर प्रदेश के पूर्वाचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ज्यादातर चीनी मिलें हैं। प्रदेश में 40 लाख गन्ना किसान परिवार हैं, जो चुनाव में निर्णायक व अहम भूमिका निभाते रहे हैं। सभी राजनीतिक दलों की नजर उन पर रहती है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में केंद्र मोदी सरकार को यहां के गन्ना किसानों ने अपने वोट दोनों हाथों से उलीच कर दिया था।

चीनी बेल्ट कहे जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को सर्वाधिक 50 फीसद से भी अधिक वोट मिले थे। इसी तरह पूर्वाचल में 42 फीसद और दोआबा में 46 फीसद मत प्राप्त हुए। लेकिन मध्य उत्तर प्रदेश वाले अवध क्षेत्र जहां गन्ने की खेती नहीं होती है, वहां सबसे कम मत 39 फीसद ही प्राप्त हुए थे। इससे साफ जाहिर है कि भाजपा अपने इन मतदाताओं को किसी भी हाल में नाराज नहीं करना चाहेगी।

चालू पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के हाल बहुत संतोषजनक नहीं है। उनकी नाराजगी के मद्देनजर सरकार ने उनके एरियर भुगतान का बंदोबस्त कर दिया है। कैबिनेट से कुल 10540 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की है।

चीनी मिलों को यह ऋण अत्यंत रियायती दरों पर मुहैया कराया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर गन्ने का बकाया जहां 20 हजार करोड़ रुपये है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 7813 करोड़ रुपये है। राज्य के कुल गन्ने का 54 फीसद का ही भुगतान किया जा सका है। जबकि पिछले साल के इसी समय तक 74 फीसद भुगतान किया जा चुका था और गन्ना एरियर 4652 करोड़ रुपये था। पिछले साल का बकाया इस बार के एरियर में जोड़ लिया जाए तो यह बढ़कर 13 हजार करोड़ हो सकता है।

Share it
Top