श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल को बच्चों की दुर्लभ सर्जरी में महारत हासिल

श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल को बच्चों की दुर्लभ सर्जरी में महारत हासिल

रायपुर : श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल में एक बार फिर से बच्चों की दुर्लभ सर्जरी पर सफलता हासिल की है। अपने आदर्श वाक्य 'से नो टू चाइल्ड ब्लाइंडनेस' के अनुरूप पीडियाट्रिक नेत्र रोग के निदान और उपचार के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया। इस अस्पताल में सस्ती कीमत पर आंखों की देखभाल का लोग फायदा उठा सकते हैं। श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल पिछले 4 वर्षों से दृष्टिहीनता की समस्या से जूझ रहे एक लाख से अधिक लोगों का मोतियाबिंद सर्जरी कर चुके हैं।

डॉक्टरों की समर्पित, केंद्रित और अनुभवी युवा टीम द्वारा 500 से अधिक सफल बाल चिकित्सा मोतियाबिंद को ठीक किया गया है। बाल चिकित्सा अंधापन यानी बच्चों में अंधापन के बारे में समाज में जागरूकता फैलाने की जरूरत है। दृष्टिदोष , मोतियाबिंद, कॉर्नियलरोग, आघात और रेटिना रोग जो बालो आयु में दृष्टिहीन होने की विभिन्न बीमारियां हैं, इनमें से कुछ अनुवांशिक और कुछ गैर अनुवांशिक है। कई उदाहरणों को पेश करते हुए श्री गणेश विनायक आई हॉस्पिटल में अपनी सफलताओं को गिनाया। और हॉस्पिटल को राज्य में एकमात्र ऐसी दुर्लभ सर्जरी के सफलता पूर्वक होने का केंद्र बताया।

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केस 1 :

6 साल की एंजेल मिंज को मोतियबिंद हुआ, जिसके बाद उनके माता पिता ने उसे हॉस्पिटल लाया लेकिन एक आँख में सर्जरी करना थोड़ा मुश्किल था ऐसे में डॉक्टरों की टीम मैं उनकी पूर्णतः सहायता की।

केस 2:

राजेंद्र यादव जिसकी उम्र 13 साल है वह लंबे समय से रेनोस्पोरिडिओसिस की समस्या का सामना कर रहे थे, अंत में वह अस्पताल पहुंचे प्रबंधन ने उनकी खराब वित्तीय स्थितियों को देखते हुए बहुत कम लागत में दुर्लभ सर्जरी करने का निर्णय लिया जो कि सफल रहा।

डॉ. चारुदत्त कमलकर, नेत्र सर्जन और निर्देशक, श्री गणेश विनायक अस्पताल, ने मीडिया कर्मी को संबोधित करते हुए कहा कि इन मामलों के अलावा महासमुंद से 8 साल के अकाश ध्रुव को कॉर्निया खराब होने के कारण कॉर्नियल टियर मिला। उनके द्वारा समय पर दृष्टिकोण ने उन्हें सफल लेंस प्रत्यारोपण करने में मदद की। साथ ही अन्य कई ऐसे उदाहरणों को दे कर उन्होंने बताया कि हॉस्पिटल में ऐसे कई दुर्लभ सर्जरी में महारत हासिल की है।

मरीज दिकचंद ने कहा ऑपरेशन करने के बाद सभी को पहले जैसे दृष्टि मिली हैं। साथ ही उन्होंने अस्पताल और डॉक्टर का दिल से धन्यवाद किया और इस तरह के दर्दनाक नेत्र रोग से न्यूनतम खर्च में छुटकारा दिलाने पर हॉस्पिटल के मदद की सराहना की।

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