बिहार में महागठबंधन से 'लेफ्ट' बाहर, कन्हैया के टिकट पर संकट !

बिहार में महागठबंधन से लेफ्ट बाहर, कन्हैया के टिकट पर संकट !

पटना : बिहार में महागठबंधन की पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे का फार्मूला बुधवार को लगभग तय हो गया। कांग्रेस 40 में से 11 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, हालांकि वाम दलों को साथ लेने पर सहमति नहीं बन पाई है। इससे इतना तय हो गया है कि जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया बेगूसराय से महागठबंधन के उम्मीदवार नहीं होंगे। ऐसे में कन्हैया को महागठबंधन से टिकट मिलने पर संकट दिख रहा है। हालांकि भाकपा ने काफी पहले ही शीर्ष नेतृत्व को कन्हैया का नाम भेज दिया था। पार्टी सूत्रों का कहना था कि महागठबंधन में शामिल नहीं होने की स्थिति में भी वह कन्हैया को बेगूसराय से उतारेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, सीटों के तालमेल के बारे में अगले कुछ दिनों के भीतर ही घोषणा की जा सकती है। राजद और कांग्रेस नेताओं की दिल्ली में बुधवार देर रात तक लंबी बैठकें हुईं जिनमें सीटों के बंटवारे को लेकर हफ़्तों से चले आ रहे गतिरोध को दूर करने पर चर्चा हुई। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी बुधवार को तमिलनाडु में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ऐसे संकेत दिए थें। गठबंधन पर उन्होंने कहा था कि कई अन्य राज्यों के साथ बिहार और झारखंड में भी गठबंधन तय हो गया है।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया है कि बुधवार को हुई बैठक में सीटों का बंटवारा लगभय तय हो गया है। राजद की ओर से कांग्रेस के लिए 11 सीटों पर रजामंदी दी गयी है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन में शामिल सभी पार्टियों को पूरा सम्मान मिलेगा और पूरी संभावना है कि 17 मार्च को सीटों के बंटवारे की घोषणा की जाए।

वाम दलों पर राजद और कांग्रेस की अलग राय

सूत्रों के मुताबिक, राजद नेता तेजस्वी यादव महागठबंधन में रालोसपा, हम, लोकतांत्रिक जनता दल और मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी को साथ रखना चाहते हैं। वह राज्य में वाम दलों का सीमित आधार होने का तर्क दे कर उन्हें सीटें देने के पक्ष में नहीं हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस चाहती है कि एक या दो सीटें देकर वाम दलों को भी महागठबंधन में साथ रखा जाए।

मालूम हो कि बिहार में 40 लोकसभा सीटें हैं जिनमें से भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में 22 सीटें जीती थीं। लोजपा को 6 सीटें मिली थीं, वहीं राजद को मात्र 4 सीटें मिली थीं। जदयू ने 2 सीटें और कांग्रेस ने 2 सीटें जीती थीं।





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