हाथी घर तोड़ता रहा, ग्रामीण बेबस होकर अपने आशियाने को उजड़ते देखते रहे

हाथी घर तोड़ता रहा, ग्रामीण बेबस होकर अपने आशियाने को उजड़ते देखते रहे

ग्रामीणों द्वारा खदेडऩे के बाद दोपहर में ही पहुंचा बगड़ा गांव, मची अफरातफरी
प्रतापपुर। अपने आशियाने को उजड़ते देखने के अलावा ग्रामीण के पास कोई दूसरा उपाय नहीं था और देखते ही देखते हाथी ने पूरे घर को क्षतिग्रस्त कर दिया,घटना आज शनिवार की सुबह आठ बजे की प्रतापपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत सोनगरा के झिंगादोहर की है। वर्तमान में करीब साठ जंगली हाथी इन गांवों के आसपास विचरण कर घरों और फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ जन हानि कर रहे हैं,दूसरी तरफ दोपहर में ग्राम बगड़ा में बस्ती के बीच एक हाथी के आ धमकने से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है।
गौरतलब है कि प्रतापपुर ब्लॉक के सोनगरा, बंशीपुर, कोरन्धा सहित आसपास के ग्रामों में करीब साठ हाथी पिछले कई दिनों से जंगलों में रहकर आबादी वाले क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं,बड़े पैमाने पर फसलों और घरों को नुकसान पहुंचाने के साथ जनहानि कर रहे हैं।ये हाथी ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं भी कभी निकल आते हैं जिससे ग्रामीणों में दहशत व्याप्त रहता है तथा ग्रामीण रतजगा करते हैं।इसी तरह प्रतापपुर के ग्राम पंचायत सोनगरा के झिंगादोहर में उस समय अफरातफरी मच गई जब सुबह आठ बजे ही एक हाथी इस गाँव में आ गया और सबके सामने ही एक घर को तोडऩे लगा।
मिली जानकारी के अनुसार शनिवार की सुबह करीब आठ बजे झुंड में से एक हाथी सोनगरा के ग्राम झिंगादोहर में घुस आया,सुबह हाथी के गांव में आने की खबर से हलचल मच गई और ग्रामीण इक_ा होने लगे। इस बीच हाथी मोहरलाल पंडों के घर के पास आकर रुक गया,हाथी के आने की खबर से पहले ही घर के लोग बाहर आ चुके थे। जैसे ही हाथी उस घर के पास आकर रुका वहां आसपास बड़ी संख्या में ग्रामीण इक_ा हो गए और वे हाथी को भगाने का प्रयास करने लगे लेकिन वे हाथी के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
हाथी घर के पास रुक गया और धीरे धीरे घर को तोडऩे लगा तथा धीरे धीरे पूरे घर को क्षतिग्रस्त कर दिया। कुछ देर बाद ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाई और हाथी को खदेडऩे में कामयाब हुए।यहां से खदेड़े जाने के बाद हाथी प्रतापपुर ब्लॉक के ही अन्य गांव बगड़ा में दोपहर बारह बजे के करीब पहुंच गया,भरी दोपहर में बीच बस्ती में पहुंचने से यहां अफरातफरी मच गई और ग्रामीण दहशत में आ गए, कुछ देर तक बस्ती में घूमने के बाद ग्रामीणों ने इक_ा हो उसे जंगल की ओर खदेड़ा।
दूसरी तरफ बड़े बड़े दावे करने वाले वन विभाग का कोई भी कर्मचारी इस दौरान कहीं नजर नहीं आया। वन विभाग द्वारा दावा किया जाता है कि वे क्षेत्र में मौजूद रहकर ग्रामीणों को हाथियों से दूर रहने की समझाइश देते हैं और हाथियों को सुरक्षित खदेडऩे का काम करते हैं। इधर शनिवार की सुबह जब हाथी झिंगादोहर में पहुंचा और घर को क्षतिग्रस्त करते रहा तथा बगड़ा बीच बस्ती में घूमते रहा तो कई घण्टों में भी वन विभाग का कोई कर्मचारी यहां झांकने तक नहीं आया जिसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश भी देखा गया।
कुमकी हाथी,रेस्क्यू सेंटर - बीरबल की खिचड़ी की तरह
वन विभाग के कुमकी हाथी और रेस्क्यू सेंटर बीरबल की खिचड़ी की तरह हो गए हैं,जिस तरह खिचड़ी पकते तो दिखती है लेकिन भूखे आदमी को नसीब नहीं होती उसी तरह वन विभाग के बड़े अधिकारी कुमकी हाथी और रेस्क्यू सेंटर के नाम पर कर रहे हैं। पिछले कई महीनों से कुमकी हाथियों के आने और रेस्क्यू सेंटर के पूर्ण होने तथा इनके बाद हाथियों से राहत दिलाने के दावे कर रहे हैं लेकिन ये सिर्फ उनके द्वारा दी जाने वाली झूठी तसल्ली तथा उनके खिलाफ बढ़ते आक्रोश को शांत करने बनाई गई रणनीति ही बस् है।वन विभाग के चतुर अधिकारी इनके नाम से यह बताने का प्रयास और झूठी वाह वाही ले रहे हैं कि वे हाथियों के मुद्दे पर कितने गम्भीर हैं और ग्रामीणों को राहत दिलाने कितना प्रयास कर रहे हैं।
हाथियों से राहत के नाम पर सौ करोड़ से ज्यादा का भ्रष्टाचार
जंगली हाथियों की संख्या और उत्पात प्रतापपुर सहित सरगुजा वन वृत के विभिन्न हिस्सों में दिन ब दिन बढ़ते जा रहे हैं,जहां आम आदमियों का जीना मुश्किल हो गया है वहीं वन विभाग हाथियों के नाम पर खुद को मालामाल करने में लगा है।प्रतापपुर के आरटीआई कार्यकर्ता राकेश मित्तल ने वन विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि हाथियों के रूप में इतनी बड़ी आपदा उनके लिए कमाई का जरिया बन गयी है, हाथी राहत, गजराज परियोजना, सोलर फेन्सिंग,जागरूकता अभियान, अध्ययन, मशाल, प्रशिक्षण, विशेषज्ञ, वीडियो, तालाब बांध, जला मोबिल, पटाखे, मधुमक्खी सहित राहत दिलाने के नाम पर वाईल्ड लाईफ और वन विभाग द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार है।

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