बिहार: एक सीट पर पांच दावेदार, भाजपा में बढ़ी टेंशन तो राजद सांसद ने तेज कर दी वोटबैंक में सेंधमारी

बिहार: एक सीट पर पांच दावेदार, भाजपा में बढ़ी टेंशन तो राजद सांसद ने तेज कर दी वोटबैंक में सेंधमारी

एसपी भाटिया/विशेष संवाददाता

2004 में भाजपा के सुशील कुमार मोदी को विजयश्री हासिल हुई। इनके इस्तीफे की वजह से उपचुनाव 2006 में हुआ। उसमें भाजपा के शाहनवाज हुसैन को जीत मिली। 2009 में भी ये जीते मगर 2014 में ये राजद के शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल से शिकस्त खा गए जबकि उस वक्त मोदी लहर पूरे देश में चली थी।


लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बावजूद बिहार में कई सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर संशय बरकरार है। यह हाल दोनों तरफ यानी महागठबंधन और एनडीए कुनबे में है। भागलपुर संसदीय सीट पर भी उम्मीदवारों को लेकर एनडीए खासकर भाजपा में संशय बरकरार है। भाजपा कार्यकर्ता पसोपेश में हैं मगर महागठबंधन की तरफ से राजद प्रत्याशी शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल इसका फायदा उठाते हुए अपनी पैठ और मजबूत करने में जुट गए हैं। पिछले चुनाव यानी 2014 में यहां बुलो मंडल ने भाजपा के शाहनवाज हुसैन को हराया था। भागलपुर शहरी इलाके में व्यापरियों के बीच जहां भाजपा की पकड़ अच्छी मानी जाती थी। वहां बुलो मंडल ने चेंबर ऑफ कॉमर्स के बुलावे पर आकर अपनी बातों को व्यापारियों के बीच रखकर अपनी पकड़ मजबूत की है। हालांकि, गांवों में लालू फैक्टर अभी भी हावी है। उनके जेल जाने से राजद के वोटों में और मजबूती का संकेत मिल रहे हैं।

कांग्रेस का मनोबल भी पांच राज्यों में हुए विधान सभा चुनाव के बाद आए नतीजों ने बढ़ाया है। बिहार विधानसभा में कांग्रेस दल के नेता सदानंद सिंह ने भी इस बावत बयान जारी किया है। तीन राज्यों में सरकार बनाकर कांग्रेस महागठबंधन का नेतृत्व करने के मूड में आ गई है। इसी वजह से भी कांग्रेस ने भी अपनी दावेदारी ठोकी है। यों कांग्रेस की दावेदारी की वजह है कि अबतक हुए 16 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सात दफा जीत हासिल की है। 1962 से 1971 तीन दफा। फिर 1980 और 1984 में। यानि पांच बार भागवत झा आजाद कांग्रेस के टिकट पर चुने गए।

इनसे पहले 1952 और 1957 में बनारसी प्रसाद झुनझुनवाला कांग्रेस टिकट पर जीते। 1977 में जनता पार्टी की लहर में डा. रामजी सिंह विजयी हुए। 1989, 1991 और 1996 में जनता दल के चुनचुन प्रसाद यादव ने बाजी मारी। 1998 में भाजपा के प्रभाष चंद्र तिवारी जीते। 1999 में सीपीएम के सुबोध राय तो 2004 में भाजपा के सुशील कुमार मोदी को विजयश्री हासिल हुई। इनके इस्तीफे की वजह से उपचुनाव 2006 में हुआ। उसमें भाजपा के शाहनवाज हुसैन को जीत मिली। 2009 में भी ये जीते मगर 2014 में ये राजद के शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल से शिकस्त खा गए जबकि उस वक्त मोदी लहर पूरे देश में चली थी।

राजद के जिलाध्यक्ष तिरुपति यादव कहते हैं कि एक बात तो पक्की है कि कांग्रेस-राजद गठबंधन के उम्मीदवार वर्तमान सांसद शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ही होंगे। इस वजह से इन्होंने बीते चार-छह महीनों से अपनी ज्यादा सक्रियता दिखाई है। लोगों के सुख दुख में शरीक हुए और लोगों की सहानुभूति भी बटोरी है। साथ ही प्रधानमंत्री और केंद्रीय सड़क मंत्री से लेकर बिजली मंत्री तक मिलकर भागलपुर की समस्या खासकर एनएच 80 के निर्माण, कहलगांव एनटीपीसी के एमजीआर सड़क का न केवल मसला उठाया बल्कि इस सड़क को बनाने के लिए घोघा से भागलपुर के ज़िलाधीश दफ्तर तक करीब 25 किलोमीटर की पैदल यात्रा भी पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ की है, जिसका नतीजा अब लोगों को दिख रहा है।

यादव कहते हैं कि सांसद ने एमपी फंड का इस्तेमाल गांवों की सड़कों, पुल-पुलिया निर्माण कराने में किया है। वे बताते हैं कि बुलो मंडल की लोकप्रियता काफी बढ़ी है और उनकी उपलब्धता भी सहज है। वहीं इनके मुकाबले भाजपा में उम्मीदवार को लेकर असमंजस्य कायम है। शाहनवाज हुसैन, अश्विनी चौबे, निशिकांत दुबे, कमलनयन चौबे या जनवरी में रिटायर हो चुके बिहार के डीजीपी केएस द्विवेदी का नाम चर्चा में है। आखिर कौन? भाजपा कार्यकर्ता प्रमोद वर्मा और अश्विनी जोशी मोंटी कहते है टिकट शाहनवाज हुसैन को ही मिलेगा।

हालांकि, शाहनवाज हुसैन भाजपा के कद्दावर नेता हैं। साढ़े सात साल भागलपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और क्षेत्र की नस-नस से वाकिफ हैं। वे केंद्रीय चुनाव समिति के एक सदस्य भी हैं। मगर केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे का दौरा हालिया दिनों में बढ़ा है। फिलहाल ये बक्सर से सांसद है। मगर इनका गृह इलाका भागलपुर ही है। वोटों का ध्रुवीकरण कराने में माहिर माने जाते हैं। और तो और ये पांच दफा भागलपुर सीट से विधायक रह चुके हैं। इनका यहां दबदबा है। मगर टिकट के नाम पर अब भी संशय के बादल हैं। पार्टी यहां जिताऊ उम्मीदवार चाहती है, मगर इनमें से कौन वह उम्मीदवार होगा तिकड़मबाजी जारी है।

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