खींचतान का शिकार गठबंधन क्या माेदी का मुकाबला कर पाएगा ?

खींचतान का शिकार गठबंधन क्या माेदी का मुकाबला कर पाएगा ?

संदीप ठाकुर

नई दिल्ली। 2019 चुनाव में भाजपा काे हराने का मंसूबा ताे विराेधी पक्ष पाले बैठा है लेकिन मंसूबे काे अंजाम देने के लिए एक नहीं हाे पा रहा है। दलाें की अड़चने व नेताओं का ईगाे लगातार सामने आ जाता है और बात बनते बनते रह जाती है। गठबंधन,महागठबंधन बनाने के लिए पार्टियों की बैठकाें का सिलसिला चल रहा है। लेकिन इन बैठकों में सीटों की संख्या को लेकर आखिरी समय की खींचतान जारी है। ऐसे में कई पार्टियाें ने अपनी साेच बदल दी है और वे अलग अलग राज्याें में वहां के लाेकल दलाें के साथ हाथ मिला चुनावी मैदान में कूदने की तैयारी कर चुके हैं। लेकिन वहां भी कुछ सीटाें पर बात अटकी पड़ी है। कम से कम पांच राज्यों में ताे यह स्थिति फिलहाल दिख रही है।

महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के बीच 40 सीटों का बंटवारा पूरा हो गया है। दोनों की संख्या और नाम दोनों पर दोनों पार्टियां राजी हो गई हैं। अब आठ सीटों पर कांग्रेस, एनसीपी, राजू शेट्टी और प्रकाश अंबेडकर की पार्टी का मामला अटका है। इसमें अकोला, सांगली, पुणे आदि की सीटें हैं। कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के बीच तालमेल तय हो गया है और सीटों की संख्या पर भी मोटे तौर पर सहमति बन गई है लेकिन दो सीटों को लेकर बात अटक गई है। कांग्रेस के एक जानकार नेता का कहना है कि इसमें भी एक सीट का मामला आसानी से सुलझ जाएगा। बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने जेडीएस को दस सीटें देने पर सहमति जता दी है पर पार्टी ने 12 सीटों की मांग कर दी है।

झारखंड में कांग्रेस, जेएमएम, जेवीएम और राजद के बीच 12 सीटों का बंटवारा हो गया है। बची हुई दो सीटों पर खींचतान है। कहा जा रहा है कि जेएमएम को तीन की बजाय चार सीट देकर कांग्रेस इस मसले को सुलझाएगी। बिहार में महागठबंधन का मसला थोड़ा उलझा हुआ पर वहां भी सीटों का विवाद सुलझाने के लिए बात कर रही पार्टियों के नेताओं का कहना है कि दो-तीन सीटों पर ही विवाद है। उनका कहना है कि आखिरी समय में कुछ नए सहयोगियों को जोड़ने के लिए इन सीटों का निपटारा आखिर में किया जाएगा। इसी तरह आम आदमी पार्टी के साथ भी एक सीट का ही मामला है। कांग्रेस छोड़ने को तैयार हो जाए तो तुरंत तालमेल हो जाएगा। ऐसे में लाख टके का सवाल यह है कि मनभेद के साथ दलाें का आपसी समझाैता हाे भी गया ताे क्या वह जीत हार के बाद भी बरकरार रह पाएगा ?

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