अयोध्या में धर्म सभा के आयोजन से क्या मिला ?

अयोध्या में धर्म सभा के आयोजन से क्या मिला ?

संदीप ठाकुर,

नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद तीनों केबैनर तलै 25 नवंबर को अयोध्या में आयाेजित धर्म संसद से आखिर क्या मिला ? आखिर माेटी रकम खर्च कर इतना भव्य आयोजन के पीछे मकसद क्या था ? मीडिया की मदद से देश भर में मंदिर का भाैकाल खड़ा क्याें किया गया ? जब कोई फैसला नहीं होना था, मंदिर निर्माण की तारीख नहीं तय होनी थी, कोई बड़ा धार्मिक मौका नहीं था, कोई प्रदर्शन नहीं होना था, फिर धर्म सभा का आयोजन क्यों ? करीब एक महीने पहले उच्च अधिकार प्राप्त संत समिति की बैठक हुई थी। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में तीन हजार संप्रदायों के साधु संतों की बैठक हुई थी। फिर 25 नवंबर को अयोध्या में जमावड़े की क्या जरूरत थी?

अयाेध्या जमावड़े काे लेकर जितनी मुंह उतनी बातें। इस पचड़े में पड़ना ही नहीं। लेकिन राजनीति की समक्ष रखने वाले अधिकांश लाेगाें का मानना है कि इस जमावड़े का राम मंदिर निर्माण से कोई लेना देना नहीं था। इसके पीछे घनघाेर राजनीति व कई मकसद थे। पहला मकसद था विभिन्न राज्याें में चल रहे विधानसभा चुनाव में वाेटराें काे घर्म के नाम पर अपने पाले में लाने का रास्ता साफ करना। दूसरा मकसद था शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की अयोध्या यात्रा काे साघू संताें की आवाज में दवा देना ताकि मंदिर मुद्दा वाे हाईजैक न कर ले।

याद रहे दशहरा के दिन जब उद्धव ठाकरे ने अयोध्या यात्रा का ऐलान किया ताे लगे हाथ विश्व हिंदू परिषद ने 25 नवंबर को अयोध्या में जमावड़े की घाेषणा कर दी थी। भाजपा काे लगा कि यदि शिव सेना मंदिर आंदोलन की अगुवाई करती दिखेगी तो भाजपा को नुकसान होगा। इसलिए अपना महत्व बनाए रखने और भाजपा का नुकसान कम करने के लिए विहिप ने धर्म सभा का आयोजन किया। इसके अलावा एक और चर्चा अयोध्या से लेकर वाराणसी तक है। वाराणसी में संतों का एक अलग सम्मेलन हो रहा था और इसे ही नाकाम बनाने के लिए अयोध्या में धर्म सभा का आयोजन हुआ। कुल मिला कर इससे एक बात ताे साबित हाे गई कि इस सभा से देश, समाज जनता किसी का भला नहीं हुआ लेकिन मंदिर निर्माण काे लेकर भाैकाल खड़ा करने की दिशा में भाजपा काे सफलता जरुर मिली है।

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