10 दिसंबर को होने वाली विपक्षी पार्टियों की बैठक का क्या एजेंडा है?

10 दिसंबर को होने वाली विपक्षी पार्टियों की बैठक का क्या एजेंडा है?

संदीप ठाकुर

नई दिल्ली। आखिरकार वह घड़ी आ ही गई जिसका इंतजार था। भाजपा विराेधी अधिकांश बड़े दल के नेता आगामी 10 दिसंबर को दिल्ली में एकजुट हाे रहे हैं। फिर सभी मिल कर बैठक करेंगे। लेकिन बैठक का एजेंडा क्या है यह अभी तक किसी को पता नहीं है। सभी अनुमान लगा रहे हैं। वैसे जानकार सूत्रों की यदि मानें ताे बैठक में शामिल हाेने वाले गैर भाजपा और गैर कांग्रेस पार्टियों के नेता राष्ट्रीय मोर्चा को एक सांगठनिक शक्ल देने का प्रयास करेंगे।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने यह बैठक बुलाई है। वैसे तो यह भाजपा विरोधी पार्टियों की बैठक है पर इसके दो स्पष्ट धड़े होंगे। एक धड़े को नायडू ने राष्ट्रीय मोर्चा का नाम दिया है। ध्यान रहे नायडू नब्बे के दशक में कांग्रेस के विरोध में बने संयुक्त मोर्चा और राष्ट्रीय मोर्चा दोनों में शामिल रहे हैं। इस बार उनका राष्ट्रीय मोर्चा भाजपा के विरोध में बन रहा है। विपक्षी गठबंधन का दूसरा धड़ा यूपीए का होगा। कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूपीए पहले से बना हुआ है, जबकि नायडू राष्ट्रीय मोर्चे की नींव रख रहे हैं। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर एक समन्वय समिति बनाई जा सकती है, जो पार्टियों के तालमेल और सीट बंटवारे आदि के बारे में बातचीत करेगी।

उधर कांग्रेस के भराेसेमंद सूत्रों का कहना है कि यह खानापूर्ति करने वाली बैठक है, जिसमें संसदीय रणनीति से ज्यादा कुछ नहीं तय होगा। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक अगले लोकसभा की रणनीति को लेकर इसमें कुछ भी खास तय नहीं होगा क्योंकि कांग्रेस नहीं चाहती है कि पांच राज्यों के चुनाव से पहले वह कोई प्रतिबद्धता जाहिर करे। दूसरी पार्टियों को भी नतीजे का इंतजार है। उसी के आधार पर आगे की रणनीति बनेगी। तभी ऐसा लग रहा है कि संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों में विपक्षी रणनीति

के बारे में इस बैठक में चर्चा होगी। इसके अलावा विपक्षी नेताओं की बैठक में चर्चा का एक मुद्दा पांच राज्यों का चुनाव होगा। नतीजों की अटकलें लगेंगी। असल में कांग्रेस इन चुनावों से अपनी किस्मत पलटने की उम्मीद कर रही है। उसका प्रदर्शन अच्छा रहा तो वह अपनी शर्तों पर विपक्षी पार्टियों के साथ गठबंधन करेगी। दूसरी ओर विपक्षी पार्टियों को लग रहा है कि अगर कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा तो वे अपनी शर्तों पर कांग्रेस को गठबंधन में शामिल करेंगे। इस अविश्वास और अनिश्चितता के बीच 10 दिसंबर की बैठक संपन्न हाे सकती है।

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