क्या छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ है जनमत, लोगों में है चर्चा

क्या छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ है जनमत, लोगों में है चर्चा

रायपुर, छत्तीसगढ़ में विधानसभा के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और अब परिणामों का बेसब्री से इंतजार है जो 11 दिसंबर को आएगा। इस चुनाव में एक चर्चा यह भी थी कि क्या प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में कोई कमी आई है। लोग इस तथ्य की मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ में प्रचार के लिए कम समय दिए जाने को लेकर चर्चा कर रहे हैं।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात विधानसभा के चुनाव में अकेले ही 34 रैलियां की थी, जबकि हाल ही में पांच राज्यों के होने वाले विधानसभा चुनाव में कुल मिलाकर उन्होंने मात्र 32 रैलियां की। जबकि तुलनात्मक रूप से राहुल गांधी ने कुल 77 जनसभाओं को संबोधित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान में 12, मध्यप्रदेश में 10 और छत्तीसगढ़ में मात्र चार सभाओं को संबोधित किया। उन्होंने तेलंगाना में 5, मिजोरम में केवल एक रैली को संबोधित किए। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ में 21 रैलियों को संबोधित किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नोट बंदी और जीएसटी की वजह से छत्तीसगढ़ के व्यापारी भी प्रधानमंत्री श्री मोदी से बेहद नाराज हैं। नाम ना बताने की शर्त पर राजधानी रायपुर के अनेक व्यापारियों एवं संगठनों ने इस बात की पुष्टि की है। कईयों ने तो यहां तक कह दिया कि यदि प्रदेश में भाजपा हारती है तो उसका एक बहुत बड़ा कारण नरेंद्र मोदी की नीतियां ही होंगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह का चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना में ज्यादा लोकप्रिय रहा है प्रदेश में। इन राजनीतिक पंडितों ने माना है कि प्रदेश के अधिकांश व्यापारियों ने यदि भाजपा के पक्ष में वोट दिया है तो वह मुख्यमंत्री के चेहरे और प्रत्याशी को देख कर और यदि बीजेपी से दूरी बनाई है और उसके खिलाफ वोट दिया है तो उसका एक बहुत बड़ा कारण नरेंद्र मोदी रहे हैं।

उनका यह भी कहना था कि हो सकता है कि इस बात को भाजपा के चुनावी पंडितों ने भी समझा तथा इसीलिए प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाएं कम आयोजित की गई। वहीं कई भाजपाइयों ने आपसी चर्चा में बताया कि छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणामों को लेकर पार्टी का हाईकमान किसी प्रकार की कोई भी जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता था इसीलिए प्रधानमंत्री की कम सभा आयोजित की गई। यह बात अलग है कि कांग्रेस की तुलना में भाजपा के दिग्गजों मंत्रियों ने छत्तीसगढ़ में एक सुनियोजित रणनीति के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में धुआंधार प्रचार किया। गौरतलब है कि यदि गुजरात में भाजपा की सरकार बनी तो इसका कारण प्रधानमंत्री मोदी का आक्रामक प्रचार और उनकी ताबड़तोड़ रैलियां रही। यह आश्चर्य जनक ही है कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह आक्रामक मूड भी नहीं दिखा जिसके लिए वह जाने जाते हैं। अब देखना है कि चुनाव परिणाम किस तथ्य को साबित करते हैं।

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