मध्यप्रदेश में गाय से जुड़े मामलों में रासुका लगाने पर कांग्रेस आलाकमान को नहीं सूझ रहा जवाब

मध्यप्रदेश में गाय से जुड़े मामलों में रासुका लगाने पर कांग्रेस आलाकमान को नहीं सूझ रहा जवाब

मध्यप्रदेश : गोकशी और गौ-तस्करी के मामलों में रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) तहत कार्यवाही के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कमलनाथ की सरकार गाय पर राजनीति के मामले में बीजेपी की पिछली सरकार से आगे निकलने की कोशिश कर रही है। सवाल कांग्रेस के ही दिग्गज नेताओं ने उठाया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हमलों से बुरी तरह घिर गए हैं। पहले दिग्विजय सिंह और अब पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के इन मामलों में रासुका लगाए जाने पर सवाल उठाने के बाद कमलनाथ को अपने बचाव में कहना पड़ा है कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा भड़काने वालों और बॉब लिंचिंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह और पी चिदंबरम भले ही कमलनाथ सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहे हो लेकिन कांग्रेस आलाकमान इस मामले में लाचार नज़र आ रहा है। कांग्रेस कम्युनिकेशन विभाग के चेयरपर्सन रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कानून और व्यवस्था राज्य का मामला है राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक इस मामले में उचित कार्यवाही करेंगे उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी निर्दोष के खिलाफ कार्यवाही नहीं होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा लेकिन वह इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए की क्या गाय से जुड़े मामलों में रासुका लगाना उचित है। उन्होंने इस बात की भी पुष्टि नहीं की कि क्या पार्टी आलाकमान की तरफ से इस मामले में कमल मुख्यमंत्री कमलनाथ को किसी तरह का कोई निर्दैश दिया गया है। उन्होंने यह जरूर किया कि किस मामले में कौन सी धारा लगानी है इसका फैसला थाने स्तर पर होता है इसके लिए मुख्यमंत्री को दोषी ठहराना उचित नहीं है।

जाहिर है कि कांग्रेस को इस मामले में माकूल जवाब नहीं सूझ रहा। कमलनाथ सरकार की नाकामी को छुपाने के लिए कांग्रेस की तरफ से बेहद लचर सफाई दी जा रही है। कांग्रेसी नेता कहते हैं कि मध्य प्रदेश में 15 साल से बीजेपी की सरकार रहु है। इसलिए वहां प्रशासन में अभी भी बीजेपी और संघ के लोगों का वर्चस्व है। संघी विचारधारा के लोग कांग्रेस की सरकार को बदनाम करने के लिए किस तरह की हरकतें कर रहे हैं। गौरतलब है कि 2 दिन पहले दिल्ली में हुए अल्पसंख्यकों के राष्ट्रीय सम्मेलन में राहुल गांधी ने भी इसी तरह की बात कही थी और भरोसा दिलाया था कि कांग्रेस की सरकारें राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में प्रशासन में घुसपैठ किए हुए संघ के लोगों को चुन चुन कर निकालेंगी। लेकिन एक के बाद एक गाय से जुड़े दो मामलों में आरोपियों पर रासुका लगाए जाने से कांग्रेस आलाकमान सकते में है। वकालत के पेशे से जुड़े कांग्रेस के तमाम नेता यह तो मानते हैं कि गोकशी और गौ तस्करी जैसे मामलों में इन्हीं से जुड़े कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे मामलों में रासुका लगाए जाने की कोई तुक नहीं है। लेकिन यही बात वो खुलकर बोलने से बचते हैं।

मध्य प्रदेश में गोकशी और गायों की अवैध तस्करी के दो अलग-अलग मामलों में रासुका के तहत हुई कार्रवाई पर कांग्रेस के कई नेताओं को सख़्त एतराज़ है। कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के बाद अब पूर्व केंद्रीय वित्त और गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भी रासुका की कर्रावाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। चिदंबरम ने गोकशी के मामले में तीन लोगों की रासुका के तरह गिरफ्तारी को पूरी तरह ग़लत करार दिया है। उन्होंने कहा है, 'मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियनम (NSA) का इस्तेमाल ग़लत था। इसे सरकार के सामने उठाया गया है। इसलिए अगर कोई ग़लती हुई है तो इस ग़लती को नेतृत्व की ओर से भी उठाया गया है।' ससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए था। उन्होंने कहा है कि गौवध (गोहत्या) पर रासुका नहीं लगनी चाहिए। खंडवा में पिछले दिनों तीन लोगों पर हुई रासुका की कार्रवाई को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा, 'आरोपियों पर गौ हत्या के लिए बने कानून के तहत कार्रवाई की जाना चाहिए थी, रासुका नहीं लगनी चाहिए थी.'

ग़ौरतलब है कि खंडवा जिले के मोघट थाने के खरखाली गांव में गो-हत्या के मामले में पकड़े गए तीन आरोपियों के खिलाफ रासुका की कार्रवाई की गई है। तीन आरोपियों में से दो को बीते शुक्रवार और एक को सोमवार को पकड़ा गया था। तीनों आरोपियों नदीम, उसके भाई शकील और आज़म पर रासुका की कार्रवाई की गई है। फिलहाल तीनों जेल में हैं। राज्य में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार आने के बाद गौ हत्या के मामले में रासुका की यह पहली कार्रवाई है। इसके बाद आगर मालवा में गायों की अवैध तस्करी के दो आरोपियों पर भी राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून यानि रासुका लगाया गया है। दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। सूबे में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद गोकशी और गौतस्करी के मामलों में रासुका लगाने के ये दो मामले सामने आ चुके हैं।

दो दिन पहले दिल्ली में हुए कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अधिवेशन में मुस्लिम नेताओं ने कमलनाथ सरकार के इस कदम की आलोचना की थी। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्य्क्ष राहुल गांधी ने भी शिरकत की। कार्यक्रम में बड़ी तादाद में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान कर्नाटक के पूर्व मंत्री रोशन बेग ने कमलनाथ सरकार की आलोचना करते हुए कहा, कि मध्यप्रदेश में तीन मुसलमानों पर एनएसए के तहत कार्रवाई की जा रही है, और हम यूपी में वोट मांगने जा रहे है। रोशन बेग का इशारा योगी सरकार की तरफ था, जहाँ गौ हत्या के मामलों में इस तरह की कार्रवाई की जाती। सिर्फ रोशन बेग ने ही सवाल खड़े नहीं किए बल्कि महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आरिफ नईम खान ने मध्यप्रदेश में रासुका के तहत हुई कार्रवाई को लेकर कमलनाथ सरकार से सवाल पूछे। आरिफ नईम खान ने पूछा कि अगर गौ हत्या के आरोपियों के खिलाफ रासुका लग रहा है तो कमलनाथ सरकार बताएं, कि मॉब लिंचिंग या गाय के नाम पर लोगों की पिटाई करने वालों के खिलाफ भी रासुका लगेगा।

दरअसल मध्य प्रदेश में कांग्रेस पहले से ही सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति करती रही है। बीजेपी की सरकार को हटाने के लिए भी उसने हिंदू आस्थाओं से जुड़े मसले उठाए थे और अपने चुनावी घोषणापत्र में भी उनको जगह दी थी। सरकार बनने के बाद कांग्रेस बीजेपी के ही रास्ते पर चलेगी इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। इसीलिए गोकशी और गौ तस्करी जैसे मामलों में रासुका के तहत कार्रवाई को लेकर खुद कांग्रेस के बड़े नेता ही सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस के इन नेताओं को लगता है कि अगर कांग्रेस बीजेपी पी से लड़ते-लड़ते उसी की नीतियों पर चलेगी और उसी की तरह व्यवहार करेगी तो फिर इस देश में धर्मनिरपेक्षता का जनाजा ही निकल जाएगा। पार्टी में धर्मनिरपेक्षता के मजबूत पैरोकारों को कमलनाथ सरकार की यह कार्यवाही जरा भी नहीं सुहा रही। शायद दिल्ली में अपने खिलाफ उठती इन्हीं आवाजों को देखते हुए कमलनाथ ने गौ रक्षा के नाम पर हिंसा भड़काने और मॉब लिंचिंग करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्यवाही करने की बात कही है।


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