तेलंगाना और राजस्थान विधानसभा के लिए चुनाव कल, क्या हैं समीकरण

तेलंगाना और राजस्थान विधानसभा के लिए चुनाव कल, क्या हैं समीकरण

राजस्थान और तेलंगाना विधानसभा के 7 दिसंबर को होने वाले चुनावों के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शुक्रवार को राजस्थान की 199 सीटों के लिए जहां 4,74,37,761 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे वहीं, तेलंगाना की 119 सीटों के लिए 2.80 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। दोनों ही राज्यों में पहली बार मतदाता सत्यापन पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) का उपयोग किया जा रहा है। मतगणना 11 दिसंबर को होगी।

राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इस राजस्थान में 20 लाख से अधिक मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। मतदान के लिए दो लाख से ज्यादा ईवीएम-वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला होने वाला है लेकिन दोनों ही दलों में बागी भारी बने हुए हैं। मुख्यमंत्री विजयराजे सिंधिंया के सामने जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह मैदान में हैं तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट का मुकाबला भाजपा के एक मात्र मुस्लिम उम्मीदवार यूनुस खान के साथ होने वाला है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि राज्य में मतदान निष्पक्ष तथा शांतिपूर्ण ढंग से करवाने का जिम्मा 1,44,941 जवान संभालेंगे, जिनमें केंद्रीय सुरक्षा बलों की 640 कंपनियां शामिल हैं। राज्य में कुल 387 नाके और चैक पोस्ट लगाए गए हैं।

विधानसभा की कुल सीटें 200 हैं लेकिन अलवर जिले की रामगढ़ सीट पर बसपा उम्मीदवार के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया है। चार लाख से ज्यादा दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधा की गयी है। उनको मतदान के लिए घर से लाने की व्यवस्था की गयी है। 259 मतदान केंद्रों का जिम्मा महिलाओं के हवाले होगा जहां मतदान दलकर्मी, सुरक्षाकर्मी इत्यादि सभी महिलाएं होंगी।

बागी बने मुसीबत

चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत से ही दोनों प्रमुख दल आंतरिक असंतोष और बगावत से जूझ रहे हैं। कांग्रेस के 26 और भाजपा के 19 बागी मैदान में हैं। भाजपा सरकार में मंत्री सुरेंद्र गोयल, हेम सिंह भड़ाना, धन सिंह रावत, ओमप्रकाश हुड़ला और राजकुमार रिणवा पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ रहे हैं। टिकट नहीं पाने वाले पांच अन्य विधायक भी अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में भाजपा उम्मीदवार को चुनौती दे रहे हैं। मारवाड़ के कई क्षेत्रों में कांग्रेस के लिए बागी चुनौती बने हुए हैं। भाजपा भी मंत्री सुरेंद्र गोयल की बगावत से निपट नहीं पाई है।

पहली बार 20 लाख से ज्यादा युवा करेंगे मतदान

199 सीटों के लिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने वालों में 2,47,22,365 पुरुष तथा 2,27,15,396 महिला मतदाता है। इनमें से पहली बार मतदान कर रहे युवा मतदाताओं की संख्या 20,20,156 हैं।

कुल 2,274 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इंडियन नेशनल कांग्रेस से 194, भारतीय जनता पार्टी से 199 उम्मीदवार, बहुजन समाज पार्टी से 189, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से 01, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से 16 और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से 28 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं जबकि 817 गैर-मान्यता प्राप्त दलों के प्रत्याशी तथा 830 निर्दलीय उम्मीदवार हैं।

तेलंगाना में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

राज्य में सत्तारूढ़ टीआरएस, कांग्रेस नीत गठबंधन और भाजपा में त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) रजत कुमार ने कहा कि मतदान सुबह सात बजे शुरू होगा और शाम पांच बजे संपन्न होगा लेकिन वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के रूप में चिन्हित की गयी 13 सीटों पर मतदान शाम चार बजे तक ही होगा। चुनाव में किसी भी गड़बड़ी से निपटने के लिए करीब 446 उड़न दस्ते मुस्तैद रहेंगे। वहीं, 448 निगरानी टीमें हालात पर नजर रखेंगी। साथ ही, 224 वीडियो निगरानी टीमें भी बनाई गई हैं।

राज्य विधानसभा चुनाव को सुगम बनाने के लिए डेढ़ लाख से अधिक मतदान अधिकारी चुनाव तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। राज्य में कुल 2. 80 करोड़ मतदाता विधानसभा चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। इस चुनाव के लिए कुल 32,815 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। चुनाव में एक ट्रांसजेंडर सहित कुल 1,821 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

अतिरिक्त महानिदेशक (कानून व्यवस्था) जितेंद्र ने बताया कि 25,000 केंद्रीय सुरक्षा बलों और अन्य राज्यों के 20,000 बलों सहित करीब एक लाख पुलिस कर्मी चुनाव ड्यूटी में लगाए गए हैं। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई।

टीआरएस के सामने हैं गठबंधन

राज्य में विधानसभा के चुनाव मूल रूप से अगले साल लोकसभा चुनाव के साथ- साथ होना था लेकिन राज्य कैबिनेट की सिफारिश के मुताबिक छह सितंबर को विधानसभा भंग कर दी गई थी। मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने समय से पहले चुनाव कराने का विकल्प चुन कर एक बड़ा दाव चला था।

सत्तारूढ़ टीआरएस को कड़ी चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने तेदेपा, तेलंगाना जन समिति और भाकपा के साथ एक गठबंधन बनाया है। टीआरएस और भाजपा ने यह चुनाव अपने-अपने दम पर लड़ने का फैसला किया है।

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