2019 के लोकसभा चुनाव से पहले हर राज्य में एक तीसरा मोर्चा बन जाएगा ?

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले हर राज्य में एक तीसरा मोर्चा बन जाएगा ?

संदीप ठाकुर

नई दिल्ली। मायावती द्वारा आज यह घाेषणा कर दिए जाने के बाद कि बहुजन समाज पार्टी आगामी समय में होने वाले विधानसभा चुनाव में अकेले ही उम्मीदवारी करेगी और कांग्रेस से अब कभी गठबंधन नहीं किया ने एक बात साफ

कर दी है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले हर राज्य में एक तीसरा मोर्चा बन जाएगा। कई राज्यों में पार्टियों के आपसी झगड़े में तीसरा मोर्चा बनता दिख रहा है ताे कई राज्याें में भाजपा कई नेताओं को मदद देकर तीसरा
मोर्चा बनवाने के लिए प्रयासरत है। चर्चा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इस काम काे अंजाम देने में विगत कई महीनाें से जुटे हैं आैर उनका प्रयास अब रंग लाता दिख रहा है।

माैजूदा हालात में भाजपा की रणनीति अपने को मजबूत करके चुनाव लड़ने के

साथ साथ विपक्ष में फूट डाल कर उसे चुनाव से पहले कमजोर करने की भी है। चर्चा है कि इस कार्य काे अंजाम देने में अमित शाह जी जान से जुटे हुए
हैं। भाजपा के लिए सबसे ज्यादा चिंता वाले तीन प्रदेश हैं – बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र। इन तीन राज्यों की 168 सीटों में से भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों ने 145 सीटें जीती थीं। यानी समूचे एनडीए को मिली सीटों
में से आधी से थोड़ी कम सीटें इन तीन राज्यों में मिली थीं। इसलिए सबसे ज्यादा फोकस इन तीन राज्यों पर है। अगर इन राज्यों में भाजपा का मुकाबला साझा विपक्ष से हुआ तो उसे बहुत बड़ा नुकसान होगा। तभी उसके नेता तीनों
राज्यों में तीसरा मोर्चा बनवाने की राजनीति कर रहे हैं। इतना ही नहीं भाजपा हर राज्य में विपक्षी पार्टियों के बागी नेताओं को खोज कर उनको खड़ा कर रहे हैं। उन्हें हर तरह की मदद की जा रही है ताकि वे ज्यादा से
ज्यादा सीटों पर मजबूत लड़ाई लड़ने वाले उम्मीदवार उतार सकें। जानकार सूत्रों का कहना है कि हर राज्य में थोड़ा बहुत आधार रखने वाले ऐसे नेताओं को मदद दी जा रही है, जो अभी भाजपा या कांग्रेस से अलग हैं। जैसे
उत्तर प्रदेश में शिवपाल यादव को मदद दिए जाने की खबर है तो गुजरात में फिर से शंकर सिंह वाघेला को खड़ा किया जा रहा है।

बिहार की तस्वीर साफ नहीं है। अभी नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू और

भाजपा एक साथ दिख रहे हैं पर जानकार सूत्रों का कहना है कि दिसंबर तक दोनों अलग हो सकते हैं। फिर नीतीश की पार्टी का एक तीसरा मोर्चा बन जाएगा। यह भी खबर है कि शरद यादव, उपेंद्र कुशवाहा और वामपंथी पार्टियों
का एक तीसरा मोर्चा बन रहा है। अगर भाजपा और दूसरी ओर राजद का गठबंधन कायम रहता है तब भी पप्पू यादव, साधू यादव जैसे कई नेताओं की पार्टियां हैं, जिनके उम्मीदवार खड़े कराए जा सकते हैं। ओड़िशा और पश्चिम बंगाल में
भी पार्टी ताेड़फाेड़ करने में जी जान से जुटी हुई है। पुछले जुनाव में इन दो राज्यों की 63 लोकसभा सीटों में से भाजपा सिर्फ तीन सीटें जीत पाई थी। पिछले साढ़े चार साल में भाजपा ने इन दोनों राज्यों में खूब मेहनत की
है और अपने को मजबूती से खड़ा किया है। पर उसे सीटों का फायदा तभी होगा, जब उसकी विरोधी पार्टियां अलग अलग लड़ें। दोनों राज्यों में अपने आप भाजपा के मन लायक स्थिति बन गई है। ओड़िशा में बीजू जनता दल, कांग्रेस और
भाजपा के बीच त्रिकोणीय लड़ाई होगी। इन तीन पार्टियों के अलावा एक नई पार्टी भी बन रही है। बीजद से अलग हुए जय पांडा और दामोदर राउत पार्टी बनाएंगे।उनका तालमेल भाजपा से हो सकता है। पश्चिम बंगाल में भी
त्रिकाेणात्मक मुकाबला तय है। यदि कांग्रेस व तृणमूल कांग्रेस का एलांयस हाेता है ताे वामपंथी अलग लड़ेंगे। आैर यदि कांग्रेस वामपंथी एक हाेते हैं ताे तृणमूल अलग लड़ेगी। त्रिकाेणात्मक मुकाबले में फायदा भाजपा काे
हाेना तय माना जा रहा है। पार्टी इसी प्रयास में लगी है कि अधिक से अधिक राज्याें में मुकाबला त्रिकाेणात्मक हाे जाए। यहां तक कि एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी के पीछे भी भाजपा की ताकत बताई जा रही है। वे हर राज्य में घूम कर एलायंस बना रहे हैं और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

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