आलोक वर्मा सीबीआई डायरेक्टर बहाल, पर सारे अधिकार हलाल

आलोक वर्मा सीबीआई डायरेक्टर बहाल, पर सारे अधिकार हलाल

संदीप ठाकुर,

नई दिल्ली । केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक अलोक कुमार वर्मा के अधिकार वापस ले लेने के केंद्र को फैसले को दरकिनार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने वर्मा की बहाली कर एक तीर से दाे शिकार किए। काेर्ट ने अपनी घाक काे बरकरार रखा और साथ ही सरकार की इज्जत भी रख ली। काेर्ट ने वर्मा काे उनकी कुर्सी ताे वापस दिला दी लेकिन उनपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सीवीसी जांच खत्म होने तक उन्हें कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला लेने से रोक दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि वर्मा के खिलाफ आगे कोई भी फैसला उच्चाधिकार प्राप्त समिति लेगी जो सीबीआई निदेशक का चयन एवं नियुक्ति करती है। काबिले गाैर है कि वर्मा को केंद्र सरकार के 23 अक्टूबर के फैसले के बाद छुट्टी पर भेज दिया गया था। सीबीआई डायरेक्टर ने खुद को छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले को चुनौती दी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर को मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। वैसे सीबीआई निदेशक 31 जनवरी को रिटायर भी हाेने वाले हैं। काेर्ट द्वारा बहाल करने के आदेश के बाद कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा कि नरेंद्र मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिनके गैर कानूनी आदेशों को उच्चतम न्यायालय ने खारिज किया है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि पीएम, चीफ जस्टिस और विरोधी दल के नेता वाली हाई पावर कमिटी आलोक वर्मा के भविष्य का फैसला करेगी। जब तक कमिटी फैसला नहीं लेती तबतक सीबीआई डायरेक्टर कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे। यानी काेर्ट ने सीबीआई निदेशक के हाथ बांध दिए। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने का सरकार का निर्णय केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की अनुशंसा पर लिया गया था। सरकार काे ऐसा फैसला सीबीआई की संप्रभुता को बचाए रखने के लिए लेना पड़ा था।

उधर कांग्रेस के साथ दूसरे राजनीतिक दलों ने भी उच्चतम न्यायालय के आदेश को सरकार के लिये बड़ा झटका करार दिया। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "प्रधानमंत्री सीबीआई को तबाह करने के मामले में उच्चतम न्यायालय के सामने बेनकाब होने वाले पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं। इससे पहले उन्होंने इसी तरह केंद्रीय सतर्कता आयोग की विश्वसनीयता (उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायधीश की सलाह की जरूरत) को दरकिनार कर उसे तबाह कर दिया था। श्री मोदी अब ऐसे पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं जिनके गैर कानूनी आदेशों को उच्चतम न्यायालय ने रद्द कर दिया है।" सुरजेवाला ने मोदी को यह याद रखने के लिये कहा कि सरकारें आती जाती रहती हैं लेकिन संस्थानों की अखंडता हमेशा जीवित रहती है।

संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रीय जनता दल सांसद मनोज झा ने इस फैसले को सरकार के मुंह पर करारा तमाचा बताया।दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा यह आदेश सरकार के लिये कलंक के समान है। आम आदमी पार्टी प्रमुख ने ट्वीटर पर लिखा, "उच्चतम न्यायालय का सीबीआई प्रमुख को बहाल करना प्रधानमंत्री के लिये कलंक है। मोदी सरकार ने हमारे देश के संस्थानों और लोकतंत्र को तबाह कर दिया। क्या सीबीआई निदेशक को आधी रात को अवैध रूप से हटाकर राफेल घोटाले की जांच रोकने की कोशिश नहीं की गई थी, जो सीधे प्रधानमंत्री की ओर इशारा करती है?" पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को अब अपने राजनीतिक फायदे के लिये सीबीआई और एनआईए जैसी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग बंद कर देना चाहिेये। उच्चतम न्यायालय के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह आदेश वर्मा के लिये अधूरी जीत है। उन्होंने कहा, उन्हें (वर्मा को) बहाल तो कर दिया गया है लेकिन उन्हें कोई भी नीतिगत फैसला लेने से रोक देना ठीक वैसा ही है जैसे निहत्थे व्यक्ति काे शेर के सामने खड़ा कर देना।

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