आलोक वर्मा ने दिया इस्तीफा, ब्यूराे के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच जारी

आलोक वर्मा ने दिया इस्तीफा, ब्यूराे के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच जारी

संदीप ठाकुर

नई दिल्ली। देश की शीर्षस्थ जांच एजेंसी केंद्रीय जांच एजेंसी ब्यूराे (सीबीआई) में विवाद खत्म हाेने का नाम नहीं ले रहा। एक ओर जहां सीबीआई डायरेक्टर पद से हटाए जाने और तबादला किए जाने के एक दिन बाद आलोक वर्मा ने सरकार को इस्तीफा भेज दिया है,वहीं दूसरी ओर सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट ने जांच जारी रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अस्थाना और डीएसपी देवेंद्र कुमार की एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड सिलेक्शन कमिटी द्वारा वर्मा का तबादला करते हुए उन्हें फायर सर्विसेज का निदेशक बनाया गया था लेकिन पहले तो उन्होंने चार्ज लेने से इनकार किया और बाद में इस्तीफा ही दे दिया। अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश काडर से 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक वर्मा सीबीआई के 27वें डायरेक्टर थे। वह दिल्ली पुलिस के कमिश्नर भी रह चुके थे। 31 जनवरी को वह रिटायर होने वाले थे। वर्मा 1 फरवरी 2017 को सीबीआई डायरेक्टर बने थे। उनका कार्यकाल काफी विवादित रहा और आखिरकार भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उन्हें 2 साल के तय कार्यकाल से पहले ही हटा दिया गया।

वर्मा और सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना दोनों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। बाद में अस्थाना के खिलाफ एफऐआईआर भी दर्ज हुई। यह विवाद इतना बढ़ा कि सरकार ने दोनों अफसरों को जबरन छुट्टी पर भेज दिया। इसके खिलाफ वर्मा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और 8 जनवरी को कोर्ट ने उन्हें डायरेक्टर पद पर बहाल तो कर दिया लेकिन सिलेक्शन कमिटी को 1 हफ्ते के भीतर उन पर लगे आरोपों पर फैसले का भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई और कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे व सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सीकरी की सदस्यता वाले पैनल ने वर्मा को डायरेक्टर पद से हटा दिया। पैनल ने उनका तबादला कर उन्हें फायर सर्विसेज का डायरेक्टर जनरल बनाए जाने का आदेश दिया। बता दें कि सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और सीजेआई की हाई-पावर्ड कमिटी करती है।

उधर दिल्ली हाई काेर्ट ने अस्थाना और डीएसपी देवेंद्र कुमार की एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका को आज खारिज कर दिया। कोर्ट ने सीबीआई को अस्थाना और देवेंद्र कुमार के खिलाफ 10 हफ्ते में जांच पूरी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि एक लोक सेवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाना चिंताजनक है। परंतु एफआईआर में जिस तरह के आरोप हैं उसकी जांच जरूरी है। जबतक कोई शख्स दोषी साबित नहीं हो जाता तबतक कानून की नजर में वह निर्दोष है। अस्थाना ने गिरफ्तारी से बचने के लिए दो हफ्ते की रोक की मांग की है।

गौरतलब है कि हैदराबाद के बिजनसमैन सतीश बाबू सना की शिकायत के आधार पर अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर में इस बात का दावा किया गया है कि उन्होंने सीबीआई स्पेशल डायरेक्टर को पिछले वर्ष लगभग तीन करोड़ रुपये दिए थे। बता दें कि अस्थाना पर आरोप है कि वह जिस मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ एक मामले की जांच कर रहे थे, उससे उन्होंने रिश्वत ली थी।

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