केजरीवाल का लचीला रुख, कांग्रेस के लिए छोड़ दूंगा सभी सीटें, पर ये है शर्त...

केजरीवाल का लचीला रुख, कांग्रेस के लिए छोड़ दूंगा सभी सीटें, पर ये है शर्त...

नई दिल्ली : आगामी लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दल एकजुट होने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। इस कारण से परस्पर विरोधी विचारधारा वाले दल भी एक साथ आ रहे हैं।उत्तर प्रदेश का उदाहरण हमारे सामने है, जहाँ समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन हो चुका है जिसका मकसद सिर्फ बीजेपी को हराना है। इसी कड़ी मे राजधानी दिल्ली मे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन की अटकलें लगाई जा रही हैं।हालांकि यह दोनों ही एक दूसरे की विरोधी पार्टियां मानी जाती रही हैं।

अन्ना हज़ारे आन्दोलन के दौरान और उसके बाद भी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल कांग्रेस पर हमले बोलते रहे हैं।कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा लगा कर ही वह दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे।लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल गयी हैं। कभी कांग्रेस के समर्थन न करने को लेकर अपने बच्चों की कसम खाने वाले अरविंद केजरीवाल भी अब काफी लचीला रुख अपना रहे हैं। वह भाजपा को हराने के लिए अपनी 7 सीटे कांग्रेस को देने के लिए भी तैयार है।

दरअसल केजरीवाल लोगो को वोट गणित के बारे में समझा रहे थे ।उन्होंने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को 46% आम आदमी पार्टी को 33 % और कांग्रेस को 15% वोट मिला था।इस बार निरीक्षण के हिसाब से सारे वोट भाजपा से 10% दूर जा रहे हैं। अरविंद केजरीवाल ने कहा अगर पूरा 10%वोट भी कांग्रेस के पास चला जाये तो भाजपा के पास 36% वोट होगा। ऐसे मे भाजपा सातों सीटों से जीत जायगी लेकिन अगर ये 10% वोट आम आदमी पार्टी को मिल जाता है तो वह सातों सीटें जीत जायेगी।

अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि अगर मोदी और अमित शाह की जोड़ी इस बार भी जीत गई तो वो सविंधान बदल देंगे और चुनाव बन्द करा देगें। यही वजह है वो भाजपा को हराने के लिए अपनी 7 सीटे कांग्रेस को देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद पिछले 70 साल से देश की जनता को बांटने का जो काम भाजपा ने किया है इससे देश को सिर्फ और सिर्फ नुकसान उठाना पड़ा है ।उनके अनुसार इतना नुक़्सान तो कभी पाकिस्तान ने भी नही किया जितना भाजपा ने किया है।



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