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अंतिम चरण का मतदान कल, दांव पर लगी है इन दिग्गजों की साख

Bhojesh Sahu 18-05-2019 16:10:19



नई दिल्ली। 17वें लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में 19 मई को आठ राज्यों की 59 सीटों पर मतदान होगा। इनमें पंजाब की सभी 13, हिमाचल प्रदेश की सभी चार, उत्तर प्रदेश की शेष 13, बिहार की आठ, झारखंड की तीन, मध्य प्रदेश की आठ और पश्चिम बंगाल की शेष नौ सीटों पर वोट पड़ेंगे। संघ शासित चंडीगढ़ की एकमात्र सीट भी शामिल है। 23 मई की तिथि मतगणना के लिए निर्धारित है

वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी की वजह से उत्तर प्रदेश में आखिरी चरण का मतदान महत्वपूर्ण हो गया है। इस चरण में पूर्वांचल की ही अधिकांश सीटें हैं, जिनमें 2014 में भाजपा ने बाजी मारी थी। इसलिए उसने इस चरण के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई रैलियां कर चुके हैं। इसी चरण में दो मंत्री भी चुनाव लड़ रहे हैं। प्रदेश में इस चरण को निर्णायक लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी के चलते भाजपा के हौसले बुलंद हैं। यहां से कांग्रेस ने अजय राय को चुनाव मैदान में उतारा है और उनके पक्ष में प्रियंका गांधी रोड शो कर चुकी हैं। गठबंधन (सपा) ने बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उनका पर्चा खारिज होने पर शालिनी यादव को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा को उम्मीद है कि वाराणसी में प्रधानमंत्री की मौजूदगी का लाभ आसपास की सीटों पर भी मिलेगा।

गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से पांच बार लगातार सांसद रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा जुड़ी है। यहां उपचुनाव में सपा-बसपा के गठजोड़ ने सेंध मार दी थी। यही वजह है कि योगी ने अभिनेता से नेता बने भाजपा प्रत्याशी रवि किशन के लिए पूरी ताकत लगा रखी है। इस बार गठबंधन ने रामभुआल निषाद को टिकट दिया है। कांग्रेस प्रत्याशी मधूसूदन त्रिपाठी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं। गाजीपुर में संचार व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा जातिवादी चक्रव्यूह में फंसे हैं। वाराणसी से सटी इस सीट पर गठबंधन (बसपा) की ओर से अफजाल अंसारी मैदान में हैं और कांग्रेस गठबंधन ने अजीत कुशवाहा को टिकट दिया है। इसी तरह चंदौली में भाजपा अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय की राह भी 2014 जैसी आसान नहीं है। सपा ने संजय चौहान को उतारा है तो कांग्रेस से पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या कुशवाहा उम्मीदवार हैं। कुशीनगर में लड़ाई दिलचस्प है।

भाजपा ने मौजूदा सांसद राजेश पांडेय का टिकट काट विजय दुबे को उम्मीदवार बनाया है। 2009 में कांग्रेस के टिकट पर जीत कर मनमोहन सरकार में मंत्री बने आरपीएन सिंह फिर से मैदान में हैं। 2014 में हार चुके आरपीएन सिंह की मुश्किलें सपा के नथुनी प्रसाद कुशवाहा बढ़ा रहे हैं। कभी वाम दलों का गढ़ रहे घोसी में इस बार भाजपा के लिए कमल खिलाना आसान नहीं है। भाजपा ने सांसद हरिनारायण राजभर पर विश्वास जताते हुए फिर मैदान में उतारा है। वहीं गठबंधन की ओर से बाहुबली मुख्तार अंसारी के करीबी माने जाने वाले अतुल राय बसपा उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने पूर्व सांसद बालकृष्ण चौहान को उतारकर मुकाबल त्रिकोणीय बना दिया है। मीरजापुर में केंद्रीय मंत्री और अपना दल (सोनेलाल) की उम्मीदवार अनुप्रिया पटेल त्रिकोणीय लड़ाई में फंसी हैं। इस बार गठबंधन ने सपा के टिकट पर भदोही से भाजपा सांसद रामचरित्र निषाद को उतारा है तो कांग्रेस ने फिर ललितेश त्रिपाठी पर दांव लगाया है। महाराजगंज, बांसगांव और रॉबट्र्सगंज सहित 13 सीटों पर वोट पड़ेंगे।

पंजाब की सभी 13 लोकसभा सीटों के लिए 278 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें से 25 महिला प्रत्याशी हैं। कई दिग्गज नेता भंवर में फंसे दिख रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ को गुरदासपुर सीट पर भाजपा के सनी देयोल से कड़ी चुनौती मिल रही है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल भी खुद फिरोजपुर से मैदान में हैं। उनके सामने शिअद से ही कांग्रेस में गए मौजूदा सांसद शेर सिंह घुबाया जीत का दम भर रहे हैं। 2014 में चार सीटें जीत कर चौंकाने वाली आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भगवंत मान संगरूर सीट से फिर मैदान में हैं। उनकी सीट बचाना पार्टी के लिए चुनौती है। उनके सामने कांग्रेस के केवल सिंह ढिल्लों व शिरोमणि अकाली दल के परमिंदर सिंह ढींडसा हैं।

प्रदेश के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह व शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल के लिए यह चुनाव साख का सवाल है। पटियाला सीट से पिछले चुनाव में आप के धर्मवीर गांधी के हाथों हार का सामना करने वालीं कैप्टन की पत्नी परनीत कौर को इस बार भी गांधी से कड़ी टक्कर मिल रही है। गांधी इस बार पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस से लड़ रहे हैं। सुखबीर के लिए चुनौती इसलिए ज्यादा है, क्योंकि उन्हें अपनी सीट के साथ-साथ पत्नी हरसिमरत कौर बादल की बठिंडा सीट पर भी पूरा दम लगाना पड़ रहा है। हैट्रिक बनाने का दावा कर रहीं हरसिमरत कौर के सामने कांग्रेस से राहुल गांधी के करीबी अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग हैं। भाजपा के लिए अमृतसर सीट नाक का सवाल बनी हुई है।

पिछली बार यहां भाजपा के दिग्गज नेता अरुण जेटली को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने करीब एक लाख वोटों से हराया था। इसी सीट पर भाजपा की टिकट से नवजोत सिंह सिद्धू जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। उनके जाने के बाद भाजपा लगातार दो चुनाव हार चुकी है। इनमें एक उपचुनाव भी शामिल है। होशियारपुर में भाजपा के सोमप्रकाश के सामने कांग्रेस के डॉ. राजकुमार चब्बेवाल हैं। पिछली बार यहां से जीत दर्ज कर चुके विजय सांपला का टिकट इस बार कट गया है। उनके समर्थक नाराज हैं, जो भाजपा के लिए चुनौती है। श्री आनंदपुर साहिब में कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। उनके सामने शिअद के दिग्गज नेता मौजूदा सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा हैं। उन्होंने पिछली बार कांग्रेस की अंबिका सोनी को हराया था।

खडूर साहिब सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस के जसबीर सिंह डिंपा और शिअद की दिग्गज नेत्री बीबी जागीर कौर के बीच है, लेकिन पीडीए की परमजीत कौर खालड़ा भी टक्कर दे रही हैं। फतेहगढ़ साहिब सीट पर दो रिटायर्ड आइएएस अधिकारी शिअद से दरबारा सिंह गुरु व कांग्रेस के डॉ. अमर सिंह हैं। डॉ. अमर सिंह मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के प्रधान सचिव रहे हैं, जबकि दरबारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के प्रधान सचिव रह चुके हैं। जालंधर में जातीय समीकरणों के चलते बसपा के बलविंदर कुमार अचानक से मुख्य मुकाबले में आते दिख रहे हैं। यहां कांग्रेस के संतोख चौधरी, शिअद के चरणजीत सिंह अटवाल और आप से पूर्व जस्टिस जोरा सिंह मैदान में हैं। लुधियाना से पिछली बार जीत दर्ज कर चुके पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू के सामने शिअद के महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल, आप के प्रो. तेजपाल व लोक इंसाफ पार्टी के सिमरजीत सिंह बैंस हैं। फरीदकोट सीट पिछली बार आप के खाते में गई थी। आप के प्रो साधू सिंह फिर मोर्चे पर हैं। मुकाबला कांग्रेस के मोहम्मद सदीक व शिअद के गुलजार सिंह रणीके से है।

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Replied by Administrator at 2019-03-11 21:44:54

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