17वीं लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद शेयर बाजार में तेजी रही

17वीं लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद शेयर बाजार में तेजी रही

नई दिल्ली । 17वीं लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद शेयर बाजार में तेजी रही, हालांकि, पिछली बार के मुकाबले इस बार शेयर बाजार ज्यादा जोश में नजर आया।

2014 में चुनाव आयोग ने 5 मार्च को कुल 9 चरणों में चुनाव कराए जाने की घोषणा की थी और उसके अगले दिन 6 मार्च को एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स 237 अंकों की उछाल के साथ 21,513 पर बंद हुआ।

रविवार को चुनाव आयोग ने सात चरणों में लोकसभा चुनाव कराए जाने की घोषणा की और सोमवार को सेंसेक्स 382.67 से अधिक अंकों की उछाल के साथ 37,054.10 पर बंद हुआ, जो पिछले छह महीने में आई सबसे बड़ी तेजी है।

2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजे अप्रत्याशित रूप से चौंकाने वाले रहे और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

पिछले आम चुनाव की घोषणा से लेकर नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के शपथ लेने की तारीख तक सेंसेक्स 3,440 अंक की भारी छलांग लगाने में सफल रहा। इसके बाद बाजार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और सेंसेक्स 29 अगस्त 2018 को 38,989.65 के स्तर को छूने में सफल रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव बाद (मई-जुलाई) निवेशकों का रिटर्न ''सकारात्मक और ज्यादा'' होता है और उतार-चढ़ाव की स्थिति ''सामान्य'' हो जाती है।

शेयर बाजार में आई तेजी की वजह पिछले चार सालों के दौरान किए गए सुधारों पर निवेशकों के भरोसे का बरकरार रहना है। सुधारों और उसके संभावित नतीजों की वजह से संस्थागत विदेशी निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजारों पर बड़ा दांव लगाया।

2017 में जहां एफआईआई ने 51,000 करोड़ रुपये का निवेश किया, वहीं 2016 में यह रकम 20,500 करोड़ रुपये रही। 2015 में एफआईआई ने 17,800 करोड़ रुपये, जबकि 2014 में यह रकम 97,000 करोड़ रुपये रही।

हालांकि, 2018-19 में चुनावी अनिश्चितता की वजह से एफआईआई के निकासी में तेजी आई है। 2018 में दिसंबर अंत कर निवेशक करीब 94,070 करोड़ रुपये शेयर बाजार से निकाल चुके हैं। 2018 के पहले लगातार छह साल एफआईआई भारतीय बाजार में केवल पैसा लगाया।

रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव पूर्व की अवधि (अक्टूबर-जनवरी) में एफआईआई की गतिविधि ''सुस्त और सपाट'' रहती है और बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति ''औसत से ऊपर'' होती है, जबकि रिटर्न ''कम या औसत के रेंज'' में रहता है।

हालांकि, चुनाव के दौरान (जनवरी से मई) की स्थिति थोड़ी अलग नजर आती है। उन्होंने कहा, 'इस दौरान शेयर बाजार में जहां एफआईआई की गतिविधि अधिक होती है और इस वजह से बाजार में वॉल्यूम भी काफी अधिक होता है। रेट ऑफ रिटर्न भी पॉजिटिव होता है।'

रिपोर्ट बताती है, '2018 में दुनिया के अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले भारतीय शेयर बाजार की स्थिति ठीक नहीं रही, लेकिन मजबूत बुनियादी आर्थिक आधारों के दम पर 2019 की दूसरी छमाही में शेयर बाजार में बाउंस बैक देखने को मिल सकता है।'

अन्य ब्रोकरेज ने भी लगाया तेजी का अनुमान: गौरतलब है कि विदेशी ब्रोकरेज मॉर्गन स्टैनली ने अपनी रिपोर्ट में 2019 के दौरान सेंसेक्स के 42,000 तक पहुंचने की उम्मीद जताई है। सामान्य स्थिति में, दिसंबर 2019 तक बंबई स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स 42,000 तक जा सकता है। इसकी संभावना 50 फीसद है।

वहीं बियर रन के मामले में बाजार 33,000 तक जा सकता है। इसकी संभावना 20 फीसद है। हालांकि, यह तभी संभव होगा जब वैश्विक स्थितियां खराब होंगी और चुनावी नतीजे ठीक नहीं होंगे।


Share it
Top