हार के डर से भाजपा-कांग्रेस के कई राज्यसभा सांसद लाेकसभा चुनाव लड़ने काे तैयार नहीं

हार के डर से भाजपा-कांग्रेस के कई राज्यसभा सांसद लाेकसभा चुनाव लड़ने काे तैयार नहीं

संदीप ठाकुर

नई दिल्ली। कहते हैं कि यदि किसी काे बना बनाया खाना खाने काे मिल जाए ताे वह पका कर खाना नहीं चाहता है। यही हाल भाजपा और कांग्रेस के कई राज्यसभा सांसदाें का है। दाेनाें दल अपने कई सांसदाें काे इस बार

लाेकसभा चुनाव लड़वाना चाहते हैं लेकिन सांसद हैं कि काेई न काेई बहाना बना सीधे जनता काे फेस करना नहीं चाहते। राज्यसभा सांसदाें काे लग रहा है कि यदि चुनाव हार गए ताे न सिर्फ उनकी पाेलपट्टी खुल जाएगी बल्कि पार्टी
में भी थू थू हाेगी।

शुरुआत भारतीय जनता पार्टी से करते हैं। पिछले दिनाें पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक हुई थी। बैठक में इस बारे में विस्तार से चर्चा हुई कि अलग अलग राज्यों में ऐसे नेताओं को लड़ाने चाहिए जो अपने क्षेत्र में मजबूत

हैं और जीतने की क्षमता रखते हैं। बताया जाता है कि इस विचार का पता चलते ही वैसे कई सांसदाें के हाथ पांव फूल गए जाे बिना चुनाव लड़े सांसद व मंत्री बन वर्षाें से मलाई खा रहे हैं। चर्चा है कि अधिकांश सांसद यह
जुगत भिड़ाने में जुट गए हैं कि उन्हें लाेकसभा का उम्मीदवार न घाेषित कर दिया जाए। मिसाल के तौर पर विजय गोयल और थावरचंद गहलोत के चुनाव लड़ने की चर्चा है। गोयल राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं तो गहलोत मध्य प्रदेश से।

राज्यसभा सांसद बनने के बाद इनका जनता के बीच में आना जाना अपेक्षाकृत काफी कम रह गया है। इसलिए सांसदाें काे यह डर सता रहा है कि यदि कहीं हार

गए ताे? इसी तरह मध्य प्रदेश से ही राज्यसभा के एक और सांसद धर्मेंद्र प्रधान के ओड़िशा में लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा है। पर उनके समर्थक ही सवाल पूछ रहे हैं कि वे क्यों लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे, जब पार्टी उनको
ओड़िशा में मुख्यमंत्री पद का दावेदार मान रही है। कायदे से उनको विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहिए, तभी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी मजबूत होगी। वैसे ही बिहार में रविशंकर प्रसाद के पटना साहिब सीट से चुनाव लड़ने की
चर्चा है। वे पिछले ही साल राज्यसभा के लिए तीसरी बार चुने गए हैं। बताया जाता है कि वे इस सीट से ताे क्या किसी भी सीट से लड़ने से हिचक रहे हैं।

चर्चा ताे यहां तक है कि जब उन्हें राज्यसभा भेजा जा रहा था तब उनसे

लोकसभा या राज्यसभा में से एक चुनने को कहा गया था और उन्होंने राज्यसभा चुन लिया। भाजपा के राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा के बेटे ऋतुराज सिन्हा को पटना साहिब से लड़ाए जाने की चर्चा है। मुख्तार अब्बास नकवी, चौधरी
बीरेंद्र सिंह और प्रकाश जावडेकर काे भी चुनाव मैदान में उतारने चर्चा है पर ये भी सीधे मुकाबले में काेई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी भी अपने कई राज्यसभा सांसदाें काे चुनाव लड़ना चाहती है
लेकिन सांसद हैं कि आनाकानी कर रहे हैं। मसलन मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के रायगढ़ सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा है।

वे राज्यसभा में हैं और उनका कार्यकाल अगले साल खत्म हो रहा है।

इसी तरह पार्टी पंजाब में प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रहे प्रताप सिंह बाजवा काे लोकसभा चुनाव लड़वाना चाहती है। पार्टी पंजाब से ही राज्यसभा सासंद अंबिका सोनी काे चुनाव मैदान में उतारना चाहती है लेकिन
साेनी अपने बेटे अनूप सोनी के लिए भी टिकट मांग रही हैं। बताया जाता है कि ऐसे कुछ और भी सांसद हैं जिन्हें कांग्रेस चुनाव लड़वाना चाहती है लेकिन वे लड़ना नहीं चाहते हैं। पार्टी ऐसा इसलिए करना चाहती है कि जिन
राज्याें में पार्टी की सरकार है यदि वहां से राज्यसभा की सीट खाली हाे जाए ताे कुछ नए लाेगाें काे वहां से राज्यसभा भेजा जा सकता है।

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