"भाग्यशाली " कुर्सी पर बैठ माेदी फिर से बनेंगे प्रधानमंत्री !

भाग्यशाली  कुर्सी पर बैठ माेदी फिर से बनेंगे प्रधानमंत्री !

संदीप ठाकुर

नई दिल्ली। मानें न मानें राजनीति व अंधविश्वास का चाेली दामन का साथ है। पढ़ालिखा या अनपढ़ शायद ही काेई ऐसा नेता हाेगा जाे अंधविश्वासी न हाे। राजनीति में किस्मत चमकाने के लिए किसी नेता के लिए उसका फटा पुराना

कुर्ता लकी हाेता है ताे काेई किसी रंग काे शुभ मानता है । काेई गले में कई तरह के मालाओं के घारण काे चमत्कारी मानता है ताे काेई नग व अंगूठियाें काे। किसी नेता के लिए उसकी गाड़ी लकी हाेती है काे काेई नंगे
पांव प्रचार करने काे जीत का कारण मानता है। इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी के लिए लकड़ी की एक कुर्सी लकी मानी जा रही है। भाजपा नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी जब जब इस कुर्सी पर
बैठे ,तब तब भाजपा रिकॉर्ड ताेड़ मताें से जीती। पार्टी के नेता इस बार भी माेदी काे इस कुर्सी पर बैठाने की तैयारी कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार यानी 8 मार्च को
कानपुर जा रहे हैं।

कानपुर के निराला नगर रेलवे ग्राउंड में 72 हजार करोड़ रुपये के प्रॉजेक्ट्स के शिलान्यास के साथ मोदी एक रैली को भी संबोधित करेंगे । तैयारियां जाेराें पर है। लेकिन यह बात बेहद कम लाेगाें

काे मालूम हाेगी कि प्रधानमंत्री के लिए एक कुर्सी का भी रंग-रोगन किया जा रहा है। पांच साल से भी अधिक समय से कांच के बक्से में रखी लकड़ी की यह कुर्सी काेई मामूली कुर्सी नहीं है। भाजपाईयाें की नजर में यह चुनाव
जिताऊ कुर्सी है। इस कुर्सी में आखिर ऐसी कौन की शक्ति है ? भाजपा नेताओं का मानना है कि यह कुर्सी पार्टी के लिए बेहद भाग्यशाली है क्योंकि जब-जब नरेंद्र मोदी इस कुर्सी पर बैठे हैं, बीजेपी कानपुर के आसपास की सीटें तो
जीती ही है, साथ ही केंद्र और प्रदेश में भी पार्टी को अभूतपूर्व सफलता मिली है।

भाजपा नेताओं की इच्छा है कि प्रधानमंत्री मोदी फिर इसी कुर्सी पर बैठें और एक बार फिर केंद्र में मोदी सरकार बने। यही कारण है कि भाजपा

ने इस कुर्सी को उस डीलर से खरीद लिया, जिसने रैली के लिए इसे उपलब्ध कराया था। बाद में इसे बीजेपी कार्यालय में शीशे के एक बक्से में धरोहर के रूप में रख दिया गया था। इस लकी कुर्सी काे तभी निकाला जाता है जब
चुनाव हाेने हाेते हैं। भाजपा कानपुर के प्रदेशाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी के मुताबिक 2014 लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में अपनी पहली चुनावी विजय
रैली 19 अक्टूबर 2013 को इंदिरा नगर मैदान में की थी तब इस कुर्सी पर वह पहली बार बैठे थे।

अप्रैल 2014 में कोयला नगर में लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम की रैली एक बार फिर कानपुर के कोयला नगर मैदान में हुई तो फिर मोदी

इसी कुर्सी पर बैठे। इसके बाद वह देश के प्रधानमंत्री बन गए। इसके बाद सितंबर 2016 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने निराला नगर मैदान में एक चुनावी सभा की थी जिसमें एक बार फिर वह इसी
कुर्सी पर बैठे थे और 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा बंपर वाेटाें से जीती थी। इसके बाद से भाजपा यह मानने लगी कि जब-जब मोदी इस कुर्सी पर बैठते हैं तो प्रदेश में बीजेपी को भारी जीत मिलती है और 2019 चुनाव में भी कुर्सी अपना चमत्कार अवश्य दिखाएगी।

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