सन स्टार एक्सक्लूसिव : हार के डर से भयभीत भाजपा ने उम्र सीमा की समाप्त ,बूढ़ाें काे भी मिलेगा टिकट

सन स्टार एक्सक्लूसिव : हार के डर से भयभीत भाजपा ने उम्र सीमा की समाप्त ,बूढ़ाें काे भी मिलेगा टिकट





संदीप ठाकुर,

नई दिल्ली । 2019 का चुनाव भाजपा के लिए जीवन मरण का सवाल बन गया है। नरेंद्र माेदी-अमित शाह की जाेड़ी हर कीमत पर यह चुनाव जीतना चाहती है,चाहे उसके लिए कुछ भी करना पड़े। यही वजह है कि पिछले 4 वर्षों से पार्टी में लागू उम्र सीमा पर माेदी-शाह की जाेड़ी ने यू टर्न लेते हुए प्रत्याशी बनने के लिए इसकी सीमा समाप्त कर दी है और हर उस नेता काे टिकट देने का फैसला किया है जाे जीतने का मद्दा रखता है। फिर चाहे 91 साल के लाल कृष्ण आडवाणी हाें या फिर 85 साल के मुरली मनाेहर जाेशी। पार्टी सबकाे टिकट देने काे तैयार है बशर्ते ये लाेग जीत की गारंटी दें। बेशक ऐसे नेता ठीक से बाेल न सकते हाें या फिर कुछ दूर चलने पर हांफ जाते हाें,लेकिन यदि अपने क्षेत्र में इनकी छवि ठीक है और ऐसे नेताओं के खिलाफ एंटी इनकंमबेंसी नहीं है ताे इनकी उम्मीदवारी में काेई अड़चन नहीं है। यदि उम्र दराज नेता अपने आप चुनाव लड़ने से मना कर दें ताे बात दीगर है।

हालांकि पार्टी ने इसकी काेई औपचारिक घाेषणा नहीं की है और न ही करने जा रही है लेकिन अंदर के उच्च पदस्थ विश्वसनीय सूत्राें ने बताया कि हाल ही में चुनाव काे लेकर पार्टी की संसदीय बाेर्ड की बैठक हुई थी। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी माैजूद थे। बैठक में इस फैसले पर मुहर लगी कि नरेंद्र माेदी वाराणसी से ताे चुनाव लड़ेगें ही साथ ही किसी एक अन्य जगह से भी पर्चा भरेंगे। दूसरा संसदीय क्षेत्र काैन सा हाेगा इसका खुलासा बाद में किया जाएगा। बैठक में दूसरा महत्वपूर्ण फैसला यह लिया गया कि पार्टी 75 साल से अधिक उम्र के नेताओं काे भी टिकट देगी । पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ऐसे नेता यदि चाहें ताे चुनाव लड़ सकते हैं,पार्टी उन्हें टिकट देगी । यदि वे नहीें लड़ना चाहें ताे पार्टी उन पर दवाब भी नहीं डालेगी। यह पूरी तरह उम्रदराज नेताओं के विवेक पर निर्भर हाेगा कि वे लड़ना चाहते हैं या नहीं। हां,एक बात अवश्य है कि ऐेसे नेताओं काे आलाकमान काे जीत के लिए आश्वस्त करना हाेगा। सूत्राें ने बताया कि उम्र सीमा में ढील सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए दी गई है लेकिन पार्टी,संगठन और सरकार में पद लेने में काेई ढील नहीं दी गई है । यानी 75 साल से अधिक उम्र के नेताओं काे काेई पद नहीं दिया जाएगा। जीत के बाद भी नेताओं काे सिर्फ सांसद बन कर रहना हाेगा। लोकसभा और राज्यसभा में भाजपा के कम से कम 15 ऐसे नेता हैं जो 75 वर्ष की उम्र को पार कर चुके हैं। भाजपा में जिन माैजूदा सांसदाें की उम्र 75 साल से उपर है उनमें लालकृष्ण आडवाणी,मुरली मनाेहर जाेशी,शांता कुमार,भुवन चेंद्र खंडूरी,करिया मुंडा,हुकुम देव नारायण यादव,विजया चत्रवर्ती,कलराज मिश्र और सुमित्रा महाजन प्रमुख हैं। बताया जाता है कि खुल कर ताे नहीं लेकिन इनमें से कईयाें ने खुद ही चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जाहिर की है ताे कुछ अपने रिश्तेदाराें के लिए टिकट चाह रहे हैं। जैसे पिछले चुनाव में यशवंत सिन्हा ने अपनी जगह बेटे जयंत सिन्हा काे टिकट दिलवा दिया था।

संसदीय बाेर्ड की बैठक में पुलवामा आतंकी हमले के बाद बालाकाेट हवाई कार्रवाई से देश भर में बदले हालात की भी समीक्षा की गई और यह फौसला किया गया कि प्रजार की मुख्य घुरी बालाकाेट ही रखा जाएगा। बैठक में माैजूद आधिकांश नेताओं का मानना था कि पिछले दिनाें पांच राज्याें के विधानसभा चुनाव में हुई पार्टी की हार भी लाेग हवाई हमले के कारण भूल चुके हैं और फिर से भाजपा व माेदी की तरफ मुड़ चुके हैं। बैठक में इस बात पर भी मुहर लगाई गई कि पुलवामा और बालाकाेट काे जाेरशाेर से प्रचार के दाैरान हर स्तर पर उठाया जाएगा। नेता चाहे छाेटा हाे या बड़ा हर काेई जनता काे यह समझाने बुझाने का प्रयास करेगा कि ऐसी कार्रवाई काेई मजबूत प्रधानमंत्री ही कर सकता है और माेदी से मजबूत प्रधानमंत्री और कौन हाे सकता है। यह बात तब तक निकलने नहीं देना है जब तक कि चुनाव संपन्न न हाे जाए।

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