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जानिए छत्तीसगढ़ में क्यों पीछे रह गई कांग्रेस? ,9 पर बीजेपी 2 पर कांग्रेस की जीत

Som Dewangan 24-05-2019 17:26:14



रायपुर। लोकसभा चुनाव 2019 में छत्तीसगढ़ की कुल 11 सीटों में से 9 सीटें बीजेपी के पाले में है. दो सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गढ़ दुर्ग और कांग्रेस के दिग्गज नेता और मंत्री टीएस सिंहदेव के गढ़ सरगुजा में बीजेपी प्रत्याशियों को बड़ी जीत मिली है. दुर्ग प्रत्याशी विजय बघेल को प्रदेश में सबसे बड़ी जीत मिली है. विजय बघेल को 3 लाख 91 हजार 978 वोटों से जीत मिली है. इस चुनाव में बीजेपी को कुल मतों का 50.7 और कांग्रेस को 34.91 फीसदी वोट शेयर मिले.

रायपुर सीट पर भी बीजेपी प्रत्याशी सुनील सोनी को 3 लाख 48 हजार 238 वोटों से जीत मिली है. सरगुजा की बात करें तो इस संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के दिग्गज नेता और मंत्री टीएस सिंहदेव व प्रेमसाय सिंह का विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है. इतना ही नहीं इस संसदीय क्षेत्र के कुल 8 विधानसभा सीटों पर बीजेपी को 2018 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. इस सीट से बीजेपी प्रत्याशी रेणुका सिंह को 1 लाख 50 हजार से ज्यादा वोटों से जीत मिली है. प्रदेश में सबसे छोटी जीत कांकेर सीट से बीजेपी प्रत्याशी मोहन मंडावी को मिली है. मोहन मंडावी ने कड़े मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी बीरेश ठाकुर को 6 हजार 914 वोटों से हराया है.

किस सीट पर किसे मिली जीत

सरगुजा से बीजेपी की रेणुका सिंह

दुर्ग से बीजेपी के विजय बघेल

रायपुर से बीजेपी के सुनील सोनी

बिलासपुर से बीजेपी अरुण सावराजनांदगांव से बीजेपी के संतोष पांडेय

महासमुंद से बीजेपी के चुन्नीलाल साहू

बस्तर से कांग्रेस के दीपक बैज

जांजगीर-चांपा से बीजेपी के गुहाराम अजगले

रायगढ़ से बीजेपी की गोमती साय

कांकेर से बीजेपी के मोहन मंडावी

कोरबा से कांग्रेस की ज्योत्सना महंत

क्यों पीछे रह गई कांग्रेस

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस को 90 में से 68 सीट पर बंपर जीत पाने वाली कांग्रेस को लोकसभा चुनाव 2019 में करारी हार मिली है. खासकर प्रदेश की ज्यादातर हाई प्रोफाइल सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों को बड़ी जीत मिली है. छत्तीसगढ़ की दुर्ग, रायपुर, राजनांदगांव, बिलासपुर, सरगुजा लोकसभा सीट पर बीजेपी को 1 लाख वोटों से अधिक की मार्जिन है. दुर्ग और रायपुर में तो बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियों में हार का अंतर 3 लाख वोटों से अधिक है. बीजेपी की इस जीत के बाद सवाल भी खड़े हो रहे हैं कि आखिर छत्तीसगढ़ की जनता का मन विधानसभा से अलग कैसे हो गया.

कांग्रेस की हार के बड़े कारण

-छत्तीसगढ़ की सभी सीटों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रभाव देखने को मिले. राष्ट्रवाद के नाम पर वोट पड़े.

-बीजेपी ने सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी बदलकर नया प्रयोग किया. इसमें दस सांसद भी थे. इससे सांसदों के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी का असर नहीं देखने को मिला.

-राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के ​बाद किसानों का कर्ज माफ और धान का समर्थन मूल्य 25 सौ रुपये करने के वादे तो तत्काल पूरे कर दिए, लेकिन सभी किसानों का कर्ज माफ नहीं किया. ये भी कांग्रेस की हार का बड़ा कारण है.

-कांग्रेस अपनी न्यूनतम आय योजना के वायदे को भूना नहीं पाई, बीजेपी के राष्ट्रवाद का मुद्दा हावि रहा.

-विधानसभा चुनाव में बंपर जीत के बाद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के आला नेताओं में एकता नहीं दिखी. ज्यादातार आला नेता अलग थलग ही नजर आए.

-छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने राज्य सरकार के चार महीने के कार्य और बीजेपी ने नरेन्द्र मोदी और केन्द्र सरकार के कार्यों को सामने रखकर चुनाव लड़ा. लोकसभा चुनाव में इसका लाभ उन्हें मिला.

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