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सरकारी बॉन्ड की यील्ड गिरकर 30 महीने के निचले स्तर पर पहुंची

Monika Wagh 17-07-2019 14:06:36



नई दिल्ली: सरकारी बॉन्ड की यील्ड गिरकर 30 महीने के निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। ऐसी उम्मीद है कि कम महंगाई और गिरती विकास दर को देखते हुए रिजर्व बैंक ब्याज दरों में बड़ी कटौती करेगा।

10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड पर यील्ड 0.10 फीसदी गिरकर 6.33 फीसदी पर पहुंच गई। ये 6 दिसंबर 2016 के बाद सबसे कम है। सिर्फ 2019 में ही बॉन्ड यील्ड 1 फीसदी गिर चुकी है। बॉन्ड कर्ज देने का इंस्टूमेंट है जिस पर मिलने वाले रिटर्न को यील्ड कहते हैं। ब्याज दर और बॉन्ड की कीमत में उल्टा संबंध होता है। अगर बॉन्ड की कीमत घटती है तो ब्याज दरें बढ़ती है वहीं बॉन्ड कीमत बढ़ने पर ब्याज दरें घटती हैं।

आप इसको ऐसे समझ सकते हैं। मान लीजिए आपने 5 फीसदी के कूपन रेट पर एक बॉन्ड खरीदा है। अगर बाजार में ब्याज दरें बढ़कर 7 फीसदी हो जाती हैं तो 5 फीसदी के बॉन्ड में किसी की दिलचस्पी नहीं होगी और उसका भाव गिर जाएगा। इकोनॉमी की शब्दावली में इसे बॉन्ड को डिस्काउंट पर ट्रेड होना कहते हैं।

इसी केस में अगर ब्याज दरें घटकर 3 फीसदी तो आपके 5 फीसदी कूपन रेट वाले बॉन्ड की यील्ड बढ़ जाएगी और बाजार में इस दर पर बॉन्ड नहीं मिलेंगे। नए बॉन्ड 3 फीसदी ब्याज के हिसाब से जारी होंगे। ऐसे में आपका बॉन्ड प्रीमियम पर ट्रेड करेगा।

बॉन्ड की कीमत और यील्ड में भी उल्टा संबंध होता है। जब बॉन्ड की कीमत बढ़ती है तो यील्ड घटती है और बॉन्ड की कीमत घटने पर यील्ड की कीमत बढ़ती है। बॉन्ड के जारी होने से उसकी मैच्युरिटी तक वो खुले बाजार में ट्रेड होते हैं। उन पर ब्याज दरें घटने बढ़ने का असर होता है।

जून में महंगाई दर 4.23 फीसदी से गिरकर 4.1 फीसदी पर पहुंच गई। ये 2 साल में सबसे निचले स्तर पर है। जून में रिटेल महंगाई दर भी 3.18 फीसदी पर पहुंच गई। ये रिजर्व बैंक के 4 फीसदी के लक्ष्य से काफी कम है। इस कारण ब्याज दरें घटने के संकेत हैं।

रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 6 और 7 अगस्त को होने वाली है। सरकार अपनी उधारी को विदेशी बाजार से जुटाने पर विचार कर रही है। यील्ड में गिरावट का ये दूसरा बड़ा कारण है। इस कारण से बाजार में बॉन्ड की सप्लाई घटेगी जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा।

साथ ही सरकार ने फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 3.4 फीसदी से घटाकर 3.3 फीसदी कर दिया है। इसका असर भी निवेशकों पर पड़ा है। बॉन्ड यील्ड में गिरावट के पीछे अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक की नरम रूख भी है। इस कारण पूरे विश्व में बॉन्ड की यील्ड घट रही है। अमेरिका के फेडरल रिजर्व से ब्याज दरें घटने के संकेत मिल रहे हैं। फेड की अगली बैठक 31 जुलाई 2019 को है।

बैंक ऑफ अमेरिका मैरिल लिंच की रिपोर्ट के मुताबिक रिजर्व बैंक 2019 में ब्याज दरों में 0.75 फीसदी की कटौती कर सकता है। वहीं डोएश बैंक एजी को लगता है की 10 साल की बॉन्ड यील्ड 2019 के अंत में गिरकर 6 फीसदी हो जाएगी। इन सबसे संकेत मिल रहा है कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों में बड़ी कटौती कर सकता है। 

अगर ब्याज दरों में कटौती होती है तो इसका सीधा फायदा आपको मिलेगा। आपके लिए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन सस्ते हो जाएंगे। इससे इकोनॉमी में मांग भी बढ़ेगी जिसका असर विकास दर (जीडीपी) पर पड़ेगा।

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