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जानिए जीएसटी से जुड़े 10 बदलाव के बारें में

Monika Wagh 12-07-2019 16:35:04



नई दिल्ली: बजट 2019 में जीएसटी से जुड़े ऐसे बहुत से बदलाव हुए हैं जिनकी चर्चा ज्यादा नहीं हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 जुलाई 2019 को बजट पेश किया था। आज हम आपको इन सभी बड़े प्रस्ताव की जानकारी देंगे।

दरअसल बजट में टैक्स पेमेंट को लेकर सुविधा दी गई है। इसके अलावा कंपोजिशन स्कीम को लेकर किए गए बदलाव भी फाइनेंस बिल में शामिल किए गए हैं। इसमें से अधिकतर चीजें नियम और कायदों से ही जुड़ी हुई हैं।

जीएसटी पर सभी बड़े फैसले जीएसटी काउंसिल करती है। जिसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं। केंद्र सरकार में वित्त मंत्री इस काउंसिल का अध्यक्ष होता है। काउंसिल की बैठक में जीएसटी रेट से जुड़े फैसले होते हैं।

1.फाइनेंस बिल में प्रस्ताव किया गया है अब से टैक्सपेयर्स इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में उपलब्ध कितनी भी रकम टैक्स, ब्याज, पेनल्टी और फीस को सेंट्रल टैक्स, स्टेट टैक्स या सेस के तौर पर ट्रांसफर कर सकते हैं। ध्यान रहे ये रकम आपके इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में होनी चाहिए।

2.अब टैक्सपेयर्स टैक्स पेमेंट के दौरान की गई गलतियों को सुधार सकेंगे। सीजीएसटी एक्ट के सेक्शन 49 में नया सब सेक्शन जोड़ा गया है। इसके तहत कोई भी रजिस्टर्ड व्यक्ति जिसने सीजीएसटी में कोई टैक्स या पेनल्टी गलती से पेमेंट कर दी है तो वो इसे अब आईजीएसटी, एसजीएसटी में एडजस्ट कर सकेगा।

3.फाइनेंस बिल में कहा गया है कि ब्याज अब सिर्फ नेट टैक्स की देनदारी पर ही लगेगा। मान लीजिए अगर किसी टैक्सपेयर की देनदारी 1 लाख रुपए है और उसके पास इनपुट टैक्स क्रेडिट 50 हजार रुपए है। अगर ये टैक्सपेयर तय तारीख के बाद रिटर्न फाइल करता है तो सिर्फ 50 हजार रुपए पर ही ब्याज लगेगा न कि 1 लाख रुपए पर लगेगा।

4.फाइनेंस बिल में नया प्रस्ताव है कि अब गुड्स की सप्लाई के लिए रजिस्ट्रेशन की लिमिट 40 लाख रुपए कर दी गई है। पहले ये लिमिट 20 लाख रुपए थी।

5.अगर अब कोई कंपनी मुनाफाखोरी करती है तो उसे मुनाफे का 10 फीसदी एंटी प्रोफिटयरिंग अथॉरिटी को पेनल्टी के तौर पर देना होगा। इसे अथॉरिटी के ऑर्डर पास करने के 30 दिन के भीतर देना होगा।

6.अब कंपोजिशन डीलर्स को साल में 1 बार रिटर्न भरना होगा। वो हर तिमाही में टैक्स दे सकते हैं। दूसरे टैक्सपेयर्स जो कि मासिक रिटर्न भर रहे हैं उको तिमाही रिटर्न भरने का विकल्प दिया जाएगा। साथ ही तिमाही टैक्स भरने का विकल्प भी फाइनेंस बिल में प्रस्तावित है।

7.फाइनेंस बिल में एक और नया प्रस्ताव दिया गया है जितके तहत केंद्र सरकार स्टेट टैक्स की रकम को भी टैक्सपेयर्स को रिफंड कर सकेगी।

8.इसके अलावा अब जीएसटी के लिए सभी टैक्सपेयर्स का आधार का सत्यापन जरूरी कर दिया गया है। इसमें कुछ क्लास के टैक्सपेयर्स को छूट दी गई है।

9.साथ ही जो भी इंट्रा स्टेट गुड्स या सर्विस का सप्लाई करते हैं और जिनका पूर्व साल में टर्नओवर 50 लाख रुपए से ज्यादा नहीं रहा ऐसे लोगों के लिए कंपोजिशन स्कीम की सुविधा दी गई है। इन पर 3 फीसदी जीएसटी लगेगा।

10.बजट में एडवांस रूलिंग के लिए नेशनल अपीलेट अथॉरिटी बनाने का भी प्रस्ताव है। अगर 2 या उससे ज्यादा राज्यों की अपीलेट अथॉरिटी अलग-अलग रूलिंग देती हैं तो उस पर नेशनल अपीलेट अथॉरिटी विचार करेगी।

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