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भार्गव परिवार के लिए भगवान है मुख्यमंत्री ‘मनोहरलाल’

Som Dewangan 23-07-2019 17:18:39



बरवाला। 6 दिसंबर, 2018 को लक्ष्मी विहार कॉलोनी का भार्गव परिवार पर पहाड टूट गया, जब घर के मुखिया बलवान भार्गव कैंसर की बिमारी से जिंदगी के जंग हार गए। उस दिन मानों भार्गव परिवार का सबकुछ खत्म हो गया। पत्नी सरोज बार—बार अपने पति के फोटो को देखकर सोचती कि पता नहीं अब कैसे घर चलेगा? लेकिन, 20 जुलाई, 2019 को जैसे ही मीडिया में खबर आई कि हरियाणा सरकार अब एक्सग्रेसिया पॉलिसी के तहत आश्रितों को नौकरी देगी। तो फिर एकबार भार्गव परिवार जीवंत हो गया। सरोज के आंखों में उम्मीद के आंसू निकल पडे। रूआसें वह बार—बार मुख्यमंत्री मनोहरलाल का धन्यवाद कर रही थी।

दरअसल, हरियाणा सरकार ने 23 साल बाद फिर से सभी कर्मचारियों को एक्सग्रेसिया (मृतकों के आश्रितों को नौकरी) का लाभ देने का ऐलान किया। इसके लिए कुछ शर्त भी निर्धारित की है कि  मृतक कर्मचारी को नौकरी करते हुए पांच वर्ष पूरे हो गए हों। मृतक कर्मचारी की उम्र अगर 52 वर्ष से अधिक हुई या फिर पत्नी या बेटे में से कोई पहले ही सरकारी नौकरी में हुआ तो आश्रितों को एक्सग्रेशिया का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि परिजनों को उतने वर्षों की तनख्वाह जरूर दी जाएगी, जितनी मृतक कर्मचारी की नौकरी शेष होगी। उन मृतक कर्मियों के परिवारों को भी योजना में शामिल किया जाएगा, जिन्होंने कर्मचारी की मृत्यु के बाद वेतन के तौर पर आर्थिक लाभ नहीं लिया है। भार्गव परिवार की भांति दर्जनों परिवार प्रदेश में ऐसे है, जिन्हें इस पॉलिसी का लाभ मिल सकता है।

स्वर्गीय बलवान भार्गव का परिवार अभी बरवाला के लक्ष्मी विहार कॉलोनी में रहता है। परिवार में उनकी पत्नी सरोज, बडा लडका मनोज और छोटा नवीन है। सरोज बताती है कि वे अपनी नौकरी में अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और 100 गज का एक प्लॉट ही खरीद पाएं। लेकिन, डेढ साल पहले परिवार को किसी की नजर लग गई और उन्हें कैंसर जैसी बिमारी ने जकड़ लिया।

नई दिल्ली स्थित राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट में उन्हें भर्ती कराया। करीब डेढ साल चले लंबे इलाज ने जिंदगी भर की जमापूंजी भी निकल गई। लेकिन, इसके बाद भी हम उन्हें बचा नहीं पाएं। बच्चे में भी अभी पढ़ ही रहे है। अब घर कैसे चलेगा, सोच—सोचकर पूरा दिन निकल जाता था। 20 जुलाई को मनोज ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने हमारे जैसे परिवारों को फिर से नौकरी देने की घोषणा की। सच्चाई में मुसीबत में मुख्यमंत्री भगवान बनकर सामने आएं। फैसला सुनने के बाद फिर से जीने की चाहत जगी है। उम्मीद है उनके बच्चों को भी पिता की जगह नौकरी मिल जाएंगी।

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