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फसल बीमा योजना में किसानों की बढी रूचि

Som Dewangan 23-07-2019 17:01:42



पलवल। भारी बारिश के कारण खेतों में हुए जलभराव के कारण 2011 में झज्जर जिले की 3,365 एकड़ फसल बर्बाद हो गई थी। पीडित किसानों ने इसके लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार से मुआवजे की गुहार लगाई। हुड्डा सरकार ने प्रति एकड़ फसलों के हुए नुकसान के लिए 3,500 रुपये मुआवजा देने का वायदा किया। लेकिन, दो साल इंतजार करने के बाद किसानों को दो—दो रूपये के चैक दिए गए। लेकिन, 2017 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रदेश के एक लाख 80 हजार किसानों को 229 करोड़ रुपए मुआवजा वितरित किया गया। किसानों में फसल बीमा योजना से मिल रही सहुलियत से रुचि बढी है।

आंकडों पर ध्यान दें तो खरीफ, 2018 के दौरान 9.9 लाख किसानों ने अपनी धान की फसल का बीमा कराया था। जबकि अभी तक 3.12 लाख किसान अपनी फसल का बीमा करा चुके है।

फसल बीमा योजना में बढती रूचि के कारण आज हरियाणा का किसान जोखिम फ्री हुआ है। सरकार का उदेश्य किसानों में सुरक्षित भाव पैदा करना है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसान को केवल दो प्रतिशत प्रिमियम देना है बाकि केंद्र व राज्य सरकार वहन कर रही हैं। पिछले वर्ष किसानों को प्रति एकड़ 25 हजार तक मुआवजा मिला, इस वर्ष 29 हजार तक पंहुच गया है। 2017 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य के एक लाख 80 हजार किसानों को 229 करोड़ रुपए मुआवजा वितरित किया है। अगर सभी किसान मुआवजा करवाते तो यह आंकड़ा तीन गुणा और बढ़ जाता। वहीं फसल राहत मुआवजा योजना के तहत 12 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा देने की नीति सरकार ने लागू की है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के मुताबिक विपक्ष किसानों में भ्रम पैदा करने की कोशिश करता है कि बीमा कंपनियां प्रीमियम ज्यादा लेकर कम मुआवजा देती है। जबकि गत वर्षों में किसानों से 523 करोड की राशि प्रीमियम रूप में ली गई। जबकि कंपनियां 1846 करोड के मुआवजे का भुगतान कर चुकी है।

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